रायपुर: भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने शनिवार को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) के 15वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। नवा रायपुर स्थित संस्थान के परिसर में आयोजित इस समारोह में उन्होंने मेधावी छात्रों को डिग्रियां प्रदान कीं और भविष्य के प्रबंधकों को वैश्विक चुनौतियों के बीच भारत की भूमिका को लेकर उत्साहित किया। अपने संबोधन में उन्होंने स्पष्ट किया कि आज की दुनिया में भौगोलिक सीमाएं अब ज्ञान और प्रभाव के लिए बाधा नहीं हैं।
विदेश मंत्री ने छात्रों को वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने की सलाह देते हुए कहा कि सीमा पार होने वाली राजनीतिक या आर्थिक घटनाएं अब सीधे हमारे करियर और दैनिक जीवन को प्रभावित करती हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि युवाओं को केवल अपनी किताबों या कार्यक्षेत्र तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि दुनिया में हो रहे बड़े बदलावों को समझना चाहिए। उनके अनुसार, अंतरराष्ट्रीय अस्थिरता के बावजूद भारत ने जिस तरह अपनी नीतियों के दम पर स्थिरता बनाए रखी है, वह देश की बढ़ती सामर्थ्य का परिचायक है।
देश की प्रगति पर चर्चा करते हुए डॉ. जयशंकर ने बुनियादी ढांचे और डिजिटल क्रांति के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि सड़कों, रेलवे और बंदरगाहों के आधुनिक विस्तार के साथ-साथ डिजिटल इंडिया ने व्यापार के तौर-तरीकों को सुगम बना दिया है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे खाद्य, स्वास्थ्य और ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में भारत को ‘आत्मनिर्भर’ बनाने की दिशा में योगदान दें, क्योंकि ये क्षेत्र भविष्य की सुरक्षा के लिए अनिवार्य हैं।
विदेश नीति के आधुनिक स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि कूटनीति अब केवल दूतावासों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भारतीय उद्योगों और व्यापार को वैश्विक बाजारों में मजबूती दिलाने का जरिया बन चुकी है। उन्होंने छात्रों को प्रेरित किया कि वे अपने कौशल का उपयोग अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का गौरव बढ़ाने के लिए करें। सफलता का मूल मंत्र साझा करते हुए उन्होंने निरंतर परिश्रम, नेतृत्व क्षमता और मजबूत पेशेवर संबंध बनाने पर विशेष जोर दिया।
इस दीक्षांत समारोह में आईआईएम रायपुर के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य, निदेशक, संकाय सदस्य और बड़ी संख्या में छात्र एवं उनके अभिभावक उपस्थित थे। विदेश मंत्री के इस संबोधन ने न केवल छात्रों को उनके करियर के लिए नई दिशा दिखाई, बल्कि वैश्विक परिदृश्य में भारत के बढ़ते कद और युवाओं की उसमें भागीदारी को भी स्पष्ट रूप से परिभाषित किया।

