प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में नई दिल्ली स्थित ‘सेवा तीर्थ’ में केंद्रीय मंत्रिपरिषद का दो दिवसीय ‘चिंतन शिविर’ आयोजित किया गया। इस उच्चस्तरीय शिविर का मुख्य उद्देश्य देश के शासन और प्रशासन में सुधार लाना तथा सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा करना था। बैठक के दौरान सरकार के कामकाज को और अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने पर विशेष जोर दिया गया।
इस चिंतन शिविर का सबसे प्रमुख और केंद्रीय मूल मंत्र यह तय किया गया कि सरकार की योजनाओं का शत-प्रतिशत लाभ अंतिम छोर पर बैठे व्यक्ति तक पहुँचे। प्रधानमंत्री मोदी ने स्पष्ट निर्देश दिए कि यह सुनिश्चित किया जाए कि देश का कोई भी जरूरतमंद और पात्र व्यक्ति सरकारी योजनाओं के लाभ से वंचित न रहे।
शिविर के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने सभी मंत्रियों को अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों के लोगों तक केंद्र सरकार की लगभग 40 से 45 प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं की पूरी जानकारी पहुंचाने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि मंत्री जनता के साथ संवाद स्थापित करने और मीडिया में बयान देने से पहले विभिन्न नीतिगत मुद्दों और समस्याओं का गहराई से अध्ययन करें।
इस दो दिवसीय मंथन के दौरान केंद्रीय मंत्रियों को कुल आठ अलग-अलग समूहों में बांटा गया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी समूहों के साथ अलग-अलग व्यक्तिगत बैठकें कीं और उनसे उनके विभागों के कामकाज का फीडबैक लिया। इस दौरान विभिन्न मंत्रालयों और प्रशासनिक विभागों के बीच आपसी तालमेल को बेहतर बनाने के तरीकों पर भी गंभीर चर्चा हुई।
बैठक में विशेष रूप से महिलाओं और युवाओं तक सरकारी योजनाओं की पहुंच को और अधिक विस्तार देने के रणनीतिक पहलुओं पर मंथन किया गया। सरकार का यह मानना है कि देश के जनसांख्यिकीय लाभ (Demographic Dividend) को सही दिशा देने के लिए युवाओं और महिलाओं का सशक्त होना सबसे आवश्यक है।
इसके अलावा, शिविर में ‘विकसित भारत @2047’ के विजन को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक और अल्पकालिक रोडमैप पर भी विचार-विमर्श किया गया। शासन व्यवस्था में सुधार, जीवन को सुगम बनाने (Ease of Living) और प्रशासनिक प्रक्रियाओं से अनावश्यक नियमों के बोझ को कम करने जैसे अहम बिंदुओं पर भी रूपरेखा तैयार की गई।
यह पूरा आयोजन सरकार के बचे हुए कार्यकाल के एजेंडे को धार देने और प्रशासनिक मशीनरी को पूरी तरह से जनता के प्रति जवाबदेह बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। चिंतन शिविर के निष्कर्षों और निर्णयों को धरातल पर उतारने के लिए आने वाले दिनों में और भी प्रशासनिक कदम उठाए जाने की संभावना है।

