उत्तर प्रदेश के नोएडा में साइबर ठगी का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जहां ठगों ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ का जाल बिछाकर एक एमबीबीएस (MBBS) छात्रा और दो बुजुर्ग महिलाओं को लगभग 144 घंटों यानी 6 दिनों तक अपने खौफ के साये में रखा। साइबर अपराधियों ने खुद को सरकारी एजेंसी का बड़ा अधिकारी बताकर इन महिलाओं को इस कदर डरा दिया कि वे अपने ही घर में कैदी बनकर रह गईं। इस दौरान ठगों ने उनसे लाखों रुपये की वसूली की और उन्हें किसी भी बाहरी व्यक्ति से संपर्क न करने की सख्त हिदायत दी।
ठगों ने इस पूरी वारदात को अंजाम देने के लिए अत्यधिक मानसिक दबाव का सहारा लिया। उन्होंने पीड़ितों को फोन और वीडियो कॉल के जरिए यह विश्वास दिलाया कि उनके खिलाफ किसी गंभीर मामले में जांच चल रही है और वे “डिजिटल अरेस्ट” के तहत उनकी निगरानी कर रहे हैं। ठगों ने महिलाओं को चौबीसों घंटे कैमरे के सामने रहने को मजबूर किया, जिससे वे इतनी सहम गईं कि पुलिस या पड़ोसियों को सूचना देने की हिम्मत भी नहीं जुटा पाईं।
इस मामले का सबसे हैरान करने वाला पहलू एमबीबीएस छात्रा के साथ किया गया व्यवहार था। छात्रा जब अपने कॉलेज के प्रैक्टिकल के लिए बाहर जाती थी, तब भी ठगों की उस पर पूरी नजर रहती थी। अपराधियों ने छात्रा को नियंत्रित करने के लिए उसकी मां को कार में बैठाकर फोन पर डिजिटल अरेस्ट में रखा था। इस दौरान छात्रा को निर्देश दिए गए थे कि वह अपने हर कदम की जानकारी उन्हें देती रहे, वरना उसकी मां को गंभीर कानूनी परिणाम भुगतने होंगे।
ठगों ने इस दौरान पीड़ितों से किस्तों में पैसे ऐंठने शुरू किए। शुरुआती जांच में पता चला है कि अपराधियों ने पहले डरा-धमकाकर महिलाओं से एक लाख रुपये ट्रांसफर करवाए और उसके बाद दो लाख रुपये की अतिरिक्त मांग की। ठग लगातार फोन कॉल के जरिए उनके संपर्क में थे और पैसे न देने पर जेल भेजने या परिवार को बर्बाद करने की धमकी दे रहे थे। मानसिक रूप से टूट चुकी महिलाएं उनकी हर बात मानने को विवश हो गईं।
घटना का खुलासा तब हुआ जब पड़ोसियों की सतर्कता ने दखल दिया। सोसाइटी के निवासियों ने गौर किया कि फ्लैट में रहने वाली महिलाएं कई दिनों से बाहर नहीं निकली हैं और उनके घर की गतिविधियां असामान्य हैं। संदेह होने पर पड़ोसियों ने तुरंत सोसाइटी की अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) को इसकी सूचना दी। जब AOA की टीम और सुरक्षा गार्ड फ्लैट पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद दरवाजा खुलवाया, तो अंदर का मंजर देखकर सब दंग रह गए। तीनों महिलाएं बेहद डरी हुई और बदहवास हालत में मिलीं।
फिलहाल, नोएडा पुलिस ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच शुरू कर दी है। साइबर सेल की टीमें उन बैंक खातों और फोन नंबरों को ट्रैक करने की कोशिश कर रही हैं, जिनका इस्तेमाल ठगी के लिए किया गया था। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं होती है और यह केवल लोगों को डराने का एक नया हथकंडा है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि वे इस तरह की कॉल्स से न डरें और तुरंत पुलिस को सूचित करें।
यह घटना शहरी क्षेत्रों में बढ़ते साइबर अपराधों और पढ़े-लिखे युवाओं के इसमें फंसने की चिंताजनक तस्वीर पेश करती है। विशेषज्ञों का मानना है कि साइबर ठग अब आधुनिक तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का मिश्रण इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे बचने का एकमात्र तरीका जागरूकता है। किसी भी अनजान वीडियो कॉल पर खुद को बंधक न बनने दें और याद रखें कि कोई भी सरकारी एजेंसी या पुलिस व्हाट्सएप या स्काइप के जरिए गिरफ्तारी या जांच की कार्यवाही नहीं करती है।

