नासिक स्थित टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के कार्यालय में एक महिला इंजीनियर के साथ हुए गंभीर उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन के दबाव के मामले ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पुलिस की हालिया जांच में इस केस से जुड़े कई चौंकाने वाले खुलासे हुए हैं, जिनमें मुख्य आरोपी निदा खान की भूमिका सबसे संदिग्ध मानी जा रही है। पीड़िता के बयानों और बरामद सबूतों ने इस मामले को केवल यौन उत्पीड़न तक सीमित न रखकर एक बड़ी साजिश की ओर मोड़ दिया है।
पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी निदा खान ने पीड़ित महिला कर्मचारी पर धर्म परिवर्तन करने के लिए भारी मानसिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनाया था। इतना ही नहीं, उसे अपना नाम बदलकर ‘हानिया’ रखने के लिए विवश किया गया। इस धर्मांतरण की प्रक्रिया के हिस्से के रूप में उसे बुर्का पहनने पर मजबूर किया गया और इस्लाम से संबंधित धार्मिक पुस्तकें दी गईं। पुलिस ने अब इन सामग्रियों को जब्त कर लिया है और इन्हें ठोस सबूत के तौर पर अदालत में पेश किया जा रहा है।
जांच में यह भी पाया गया है कि इस साजिश के तार तकनीकी और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जुड़े हो सकते हैं। पीड़िता के मोबाइल फोन में जबरन कुछ ऐसे ऐप्स इंस्टॉल कराए गए थे, जिनका एकमात्र उद्देश्य उसे धर्म परिवर्तन के लिए प्रभावित करना और कट्टरपंथी विचारधारा की ओर धकेलना था। इसके अलावा, आरोपी ने पीड़िता के सभी मूल शैक्षिक दस्तावेज (Educational Documents) अपने कब्जे में ले लिए थे, ताकि वह पूरी तरह से उनके नियंत्रण में रहे।
मामले का सबसे डरावना पहलू यह है कि पीड़िता को नौकरी के बहाने विदेश भेजने की भी तैयारी की गई थी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपियों ने उसे मलेशिया भेजकर वहां ‘इमरान’ नाम के एक व्यक्ति के पास काम पर लगाने की योजना बनाई थी। पुलिस अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि क्या यह मानव तस्करी या किसी बड़े अंतरराष्ट्रीय रैकेट का हिस्सा तो नहीं था। फिलहाल मुख्य आरोपी निदा खान फरार है और पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है।
आरोपी निदा खान ने कानून के शिकंजे से बचने के लिए नासिक सेशन कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका भी दायर की थी। उसने अपनी दो महीने की गर्भावस्था का हवाला देते हुए अदालत से राहत की गुहार लगाई थी, लेकिन अपराध की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट ने उसे कोई भी राहत देने से स्पष्ट इनकार कर दिया। इस मामले में पुलिस की तत्परता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि अब तक कुल 8 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पीड़िता ने अपनी शिकायत में जून 2025 से मार्च 2026 के बीच हुए भयावह अनुभवों को साझा किया है। उसने बताया कि पांच आरोपियों ने मिलकर उसका यौन उत्पीड़न किया, उसका पीछा (स्टॉकिंग) किया और उसकी धार्मिक भावनाओं को लगातार ठेस पहुंचाई। गुड़ी पड़वा जैसे त्योहार के दौरान ऑफिस की पेंट्री में उसके साथ छेड़छाड़ की गई और उसके आराध्य हिंदू देवी-देवताओं पर बेहद अपमानजनक टिप्पणियां की गईं, जिससे वह गहरे मानसिक सदमे में चली गई थी।
आरोपी अक्सर उन महिला कर्मचारियों को निशाना बनाते थे जो मध्यमवर्गीय परिवारों से आती थीं और जिनकी उम्र 21 से 30 वर्ष के बीच थी। ये महिलाएं एसोसिएट लेवल पर काम करती थीं और उनकी मासिक सैलरी महज 20 हजार रुपये थी। आरोपियों ने पीड़िता के टीम लीडर होने का फायदा उठाते हुए ट्रेनिंग के बहाने उसे अनुचित तरीके से छुआ और उसकी शादीशुदा जिंदगी को लेकर भी भद्दे कमेंट्स किए, जिससे कार्यस्थल का माहौल पूरी तरह से असुरक्षित हो गया था।
इस संवेदनशील मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए TCS ने स्पष्ट किया है कि कंपनी उत्पीड़न के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति रखती है। आरोपों में घिरे सभी कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है। हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा कि उनके आंतरिक POSH या एथिक्स चैनल पर पहले कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई थी। अब मामले की गंभीरता को देखते हुए टाटा ग्रुप ने एक स्वतंत्र ओवरसाइट पैनल गठित किया है और निष्पक्ष जांच के लिए बाहरी एजेंसियों की मदद ली जा रही है।

