दीवाली का त्योहार पास आते ही हर साल यह सवाल देश के करोड़ों लोगों के मन में तैरने लगता है कि क्या इस बार पटाखों की बिक्री और इस्तेमाल पर राहत मिलेगी या बैन जारी रहेगा। दिल्ली-एनसीआर समेत देश के विभिन्न हिस्सों में प्रदूषण के खतरनाक स्तर को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट में इस मुद्दे पर लंबी और तीखी बहसें देखने को मिली हैं। शीर्ष अदालत ने इस विषय पर अपना रुख बेहद सख्त रखा है और जनस्वास्थ्य को सर्वोपरि मानते हुए प्रतिबंधों को ढीला करने से साफ इनकार किया है।
अदालत में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं और पटाखा निर्माताओं ने कम प्रदूषण फैलाने वाले ‘ग्रीन क्रैकर्स’ (Green Crackers) की अनुमति देने की पुरजोर मांग की थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज करते हुए स्पष्ट किया कि ग्रीन क्रैकर्स की आड़ में प्रतिबंधित और अत्यधिक जहरीले रसायन वाले पटाखे भी बाजार में बिकने लगते हैं। अदालत का मानना है कि जमीनी स्तर पर यह जांचना लगभग असंभव हो जाता है कि कौन सा पटाखा ग्रीन है और कौन सा सामान्य, जिससे पूरी व्यवस्था का उल्लंघन होता है।
सुनवाई के दौरान जजों की टिप्पणी बेहद सख्त रही, जहां उन्होंने टिप्पणी करते हुए कहा कि इंसानों द्वारा प्रकृति और वायु गुणवत्ता का जिस तरह से नुकसान किया जा रहा है, उसे देखकर ‘भगवान भी हैरान रह जाएंगे’। सुप्रीम कोर्ट ने दोहराया कि संविधान का अनुच्छेद 21 हर नागरिक को स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण में जीने का अधिकार देता है। अदालत ने साफ कहा कि किसी भी उत्सव को मनाने का अधिकार लोगों के स्वास्थ्य और सांस लेने की आजादी से बड़ा नहीं हो सकता।
सुप्रिम कोर्ट ने दिल्ली पुलिस और स्थानीय प्रशासन को आदेश दिया है कि वे केवल कागजी नियम न बनाएं, बल्कि जमीनी स्तर पर पटाखों की अवैध बिक्री और इस्तेमाल पर सख्त कार्रवाई करें। कोर्ट ने चेतावनी दी कि यदि प्रतिबंध का पालन कराने में लापरवाही बरती गई, तो इसके लिए संबंधित अधिकारियों को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया जाएगा और उन पर अवमानना की कार्रवाई हो सकती है।
प्रदूषण के आंकड़ों पर नजर डालें तो दीवाली के आसपास पूरे उत्तर भारत में हवा की गुणवत्ता (AQI) ‘गंभीर’ श्रेणी में पहुंच जाती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं, जिसमें सल्फर डाइऑक्साइड और लेड जैसे हानिकारक तत्व होते हैं, बच्चों, बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए जानलेवा साबित होता है। इसी वजह से पर्यावरण विशेषज्ञों और डॉक्टरों ने भी पटाखों पर पूरी तरह रोक का समर्थन किया है ताकि अस्पतालों में मरीजों की तादाद को बढ़ने से रोका जा सके।
निष्कर्ष तौर पर, आगामी दीवाली पर दिल्ली-एनसीआर और अन्य अत्यधिक प्रदूषित क्षेत्रों में सामान्य या ग्रीन, किसी भी तरह के पटाखे फोड़ने या बेचने की कोई छूट नहीं है। अदालत और प्रशासन का संदेश बिल्कुल साफ है कि इस बार की दीवाली रोशनी, दिए और खुशियों की होनी चाहिए, धुएं और प्रदूषण की नहीं। नागरिक अपनी और अपनों की सेहत का ध्यान रखते हुए पर्यावरण के अनुकूल तरीकों से दीवाली का पर्व मनाएं। हॉल और कोलंबिया के माइकल वुडफोर्ड को संयुक्त रूप से अर्थशास्त्र का नोबेल

