हाल ही में विमानन क्षेत्र में एक बड़ा सुरक्षा विवाद सामने आया है, जिसके बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों और क्रू सदस्यों के चयन को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं। फ्लाईदुबई की एक उड़ान के दौरान हुई गंभीर सुरक्षा चूक और कॉकपिट उल्लंघन की घटना के बाद, इज़राइल के परिवहन मंत्रालय ने विदेशी एयरलाइनों के लिए सुरक्षा दिशा-निर्देशों में भारी फेरबदल किया है। इन नए और सख्त नियमों का पालन करते हुए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय एयरलाइन एयर फ्रांस (Air France) ने पाकिस्तान सहित कुल 31 देशों के पायलटों और केबिन क्रू पर इज़राइल (तेल अवीव) जाने वाली उड़ानों में ड्यूटी करने पर आधिकारिक रोक लगा दी है।
इस पूरी पाबंदी की मुख्य पृष्ठभूमि वह घटना है जो फ्लाईदुबई (Flydubai) के विमान में घटी थी। उड़ान के दौरान कॉकपिट में अनधिकृत प्रवेश और सुरक्षा प्रोटोकॉल के उल्लंघन जैसी संवेदनशील घटना ने इज़रायली सुरक्षा एजेंसियों और विमानन अधिकारियों को गहरी चिंता में डाल दिया था। इस घटना के बाद इज़राइल सरकार ने अपनी हवाई सीमाओं की सुरक्षा और विमानन क्षेत्र में किसी भी संभावित खतरे को टालने के लिए विदेशी विमानन कंपनियों पर कड़ा दबाव बनाया, जिसके परिणामस्वरूप यह नया प्रतिबंधात्मक ढांचा तैयार किया गया है।
नया नियम केवल एकल नागरिकता वाले कर्मचारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह दोहरी नागरिकता (Dual Citizenship) वाले क्रू सदस्यों पर भी समान रूप से लागू होता है। इस सूची में मुख्य रूप से वे देश शामिल हैं जिनके इज़राइल के साथ सीधे कूटनीतिक संबंध नहीं हैं। इसमें पाकिस्तान, ईरान, इराक, सऊदी अरब, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, मलेशिया और अल्जीरिया सहित कुल 31 देश शामिल हैं। उदाहरण के लिए, यदि एयर फ्रांस या किसी अन्य एयरलाइन का कोई कर्मचारी फ्रांस या किसी अन्य पश्चिमी देश का पासपोर्ट रखता है, लेकिन उसके पास प्रतिबंधित देशों में से किसी एक की भी दोहरी नागरिकता है, तो वह इज़राइल के लिए उड़ान भरने वाले विमान के क्रू दल में शामिल नहीं हो सकेगा।
एयर फ्रांस के अलावा चेक गणराज्य की एयरलाइन ‘स्मार्टविंग्स’ (Smartwings) सहित कुछ अन्य विमानन कंपनियों ने भी इज़रायली प्रशासन के इन निर्देशों का पालन करने की पुष्टि की है। एयरलाइनों के लिए यह अनुपालन अनिवार्य कर दिया गया है ताकि तेल अवीव के बेन गुरियन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उतरने वाली उड़ानों की सुरक्षा से किसी भी प्रकार का समझौता न किया जाए। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस तरह के कूटनीतिक और संवेदनशील क्षेत्रों से आने वाले या उनसे जुड़े कर्मचारियों की पृष्ठभूमि की जांच करना वर्तमान समय में अत्यंत आवश्यक हो गया है।
हालांकि, राष्ट्रीयता और दोहरी नागरिकता के आधार पर इस तरह के प्रतिबंध लगाए जाने को लेकर विमानन जगत और मानवाधिकार हलकों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। एयरलाइंस से जुड़े कई श्रमिक संघों और श्रम वकीलों ने इन नियमों की कड़ी आलोचना की है। उनका तर्क है कि नागरिकता या राष्ट्रीयता के आधार पर पेशेवर ड्यूटी से रोकना सीधे तौर पर भेदभावपूर्ण है और यह पेशेवर नैतिकता तथा समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है। इसके बावजूद, इज़रायली सुरक्षा अधिकारियों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए इन नियमों में किसी भी तरह की ढील देने से इनकार कर दिया है।
विमानन विशेषज्ञों का मानना है कि इस प्रकार के प्रतिबंधों से एयरलाइनों के लिए रोस्टर प्रबंधनऔर क्रू शेड्यूलिंग में काफी जटिलताएं पैदा हो सकती हैं। एयरलाइंस को अब उन उड़ानों के लिए विशेष रूप से उन क्रू सदस्यों का चयन करना होगा जो इन 31 देशों की नागरिकता या पृष्ठभूमि से पूरी तरह मुक्त हों। यह स्थिति विशेष रूप से उन वैश्विक एयरलाइनों के लिए एक बड़ी चुनौती बन गई है जिनके पास विभिन्न राष्ट्रीयताओं और विविध पृष्ठभूमियों वाले कर्मचारियों का एक विशाल समूह है।
कुल मिलाकर, फ्लाईदुबई की घटना के बाद उठाया गया यह कदम अंतरराष्ट्रीय विमानन सुरक्षा में बदलते समीकरणों और कड़े होते सुरक्षा उपायों को दर्शाता है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अन्य अंतरराष्ट्रीय एयरलाइंस भी इज़राइल के इन कड़े निर्देशों का पूरी तरह से पालन करती हैं या नहीं, और क्या श्रम संगठनों के विरोध के बाद इन नियमों में कोई संशोधन किया जाता है या नहीं। फिलहाल, एयर फ्रांस की उड़ानों में यात्रा करने वाले यात्रियों की सुरक्षा के मद्देनजर यह प्रतिबंध सख्ती से लागू कर दिया गया है।

