पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद एक बार फिर हिंसा और आगजनी का दौर शुरू हो गया है। राज्य की राजधानी कोलकाता समेत कई जिलों से तोड़फोड़ और झड़पों की खबरें आ रही हैं। चुनावी नतीजों के बाद उपजी इस राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता ने राज्य के कई हिस्सों में तनावपूर्ण स्थिति पैदा कर दी है, जिससे आम जनजीवन और कानून-व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई है।
कोलकाता के ऐतिहासिक हॉग मार्केट (न्यू मार्केट) इलाके में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कुछ लोगों ने बुलडोजर की मदद से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के एक दफ्तर को जमींदोज कर दिया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि यह दफ्तर अवैध रूप से सरकारी जमीन पर कब्जा करके बनाया गया था। इस अचानक हुई कार्रवाई से स्थानीय दुकानदारों में दहशत फैल गई, जिसके चलते उन्हें अपनी दुकानें बीच में ही बंद करनी पड़ीं।

हिंसा की लपटें आसनसोल तक भी पहुंच गई हैं, जहां देर रात टीएमसी के एक कार्यालय में आग लगा दी गई। यह दफ्तर वार्ड नंबर 53 की पार्षद मौसमी बोस का बताया जा रहा है। आग इतनी भीषण थी कि दफ्तर के साथ-साथ पास की एक दुकान भी इसकी चपेट में आ गई और सब कुछ जलकर राख हो गया। इस घटना के बाद से पूरे कोर्ट मोड़ इलाके में भारी पुलिस बल तैनात है और तनाव बना हुआ है।
जगतबल्लभपुर से भी ऐसी ही दुखद खबरें आई हैं, जहां टीएमसी नेताओं ने आरोप लगाया है कि बीजेपी समर्थित उपद्रवियों ने उनके पार्टी कार्यालय को आग के हवाले कर दिया है। टीएमसी नेता कल्याण बनर्जी ने सोशल मीडिया पर इस घटना का वीडियो साझा करते हुए इसे लोकतंत्र के लिए खतरनाक बताया है। उनका कहना है कि बंगाल के लोग अब इस तरह की हिंसा झेलने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं।
इस राजनीतिक हिंसा ने अब तक दो लोगों की जान ले ली है। पुलिस रिपोर्ट के अनुसार, बीरभूम के नानूर में टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की धारदार हथियार से हमला कर हत्या कर दी गई। वहीं दूसरी ओर, न्यू टाउन इलाके में एक विजय जुलूस के दौरान हुई झड़प में बीजेपी कार्यकर्ता मधु मंडल की मौत हो गई। दोनों ही दल एक-दूसरे पर अपने कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप लगा रहे हैं।
टीएमसी के वरिष्ठ नेताओं ने इस पूरी स्थिति के लिए केंद्र सरकार और सुरक्षा बलों को कटघरे में खड़ा किया है। डेरेक ओ’ब्रायन ने आरोप लगाया कि कोलकाता में बुलडोजर की कार्रवाई पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की मौजूदगी में हुई। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि यह सब ‘सरकारी निगरानी’ में किया जा रहा है, जो बेहद निंदनीय है।

सांसद महुआ मोइत्रा ने भी कोलकाता की घटनाओं पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने व्यंग्यात्मक लहजे में इसे बंगाल का ‘परिवर्तन’ करार देते हुए सोशल मीडिया पर अपना गुस्सा जाहिर किया। टीएमसी नेतृत्व का मानना है कि बीजेपी हार की हताशा में राज्य का माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही है और उनके दफ्तरों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है।
राज्य में बिगड़ती स्थिति को देखते हुए चुनाव आयोग ने बेहद सख्त रुख अख्तियार किया है। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर के साथ आपात बैठक की। आयोग ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि हिंसा भड़काने वाले और तोड़फोड़ करने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा न जाए और उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
चुनाव आयोग ने अधिकारियों को निर्देश दिया है कि संवेदनशील और प्रभावित इलाकों में निरंतर गश्त (पेट्रोलिंग) की जाए ताकि दंगाइयों में कानून का खौफ बना रहे। आयोग ने जिलाधिकारियों और पुलिस अधीक्षकों को व्यक्तिगत रूप से स्थिति की निगरानी करने और शांति बहाली के लिए हर संभव कदम उठाने को कहा है।
फिलहाल, पूरे राज्य में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। हालांकि कई इलाकों में अब भी छिटपुट झड़पों की खबरें मिल रही हैं, लेकिन प्रशासन का दावा है कि स्थिति को नियंत्रित करने के प्रयास जारी हैं। आम जनता में इस हिंसा को लेकर काफी भय है और सभी की नजरें अब प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं।

