रायपुर, 30 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ सरकार सुशासन और पारदर्शिता के अपने संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए खनिजों के अवैध उत्खनन और परिवहन के खिलाफ बेहद सख्त रुख अपना रही है। मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में खनिज संपदा की चोरी और राजस्व की क्षति बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इसी कड़ी में प्रशासन ने अवैध गतिविधियों में संलिप्त लोगों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर अमल शुरू कर दिया है।
मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुपालन में खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने प्रदेश के 11 प्रमुख जिलों के कलेक्टरों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित इस बैठक में रायपुर, बिलासपुर, धमतरी और कांकेर जैसे प्रमुख रेत उत्पादक जिलों की कार्यप्रणाली की गहन जांच की गई। सचिव ने स्पष्ट किया कि प्रशासन की सक्रियता ही अवैध कारोबार पर लगाम लगा सकती है।
बैठक के दौरान सचिव ने निर्देश दिए कि बाजार में रेत की आपूर्ति में किसी भी प्रकार की कृत्रिम कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी स्वीकृत खदानों से उनकी पूर्ण क्षमता के अनुसार उत्पादन सुनिश्चित किया जाए ताकि आम जनता को उचित और किफायती दरों पर रेत उपलब्ध हो सके। आपूर्ति में बाधा आने से न केवल निर्माण कार्यों पर असर पड़ता है, बल्कि इससे अवैध खनन को भी बढ़ावा मिलता है।
एक महत्वपूर्ण सामाजिक पहल के रूप में, सचिव ने प्रधानमंत्री आवास योजना के हितग्राहियों का विशेष ध्यान रखने को कहा। उन्होंने कलेक्टरों को निर्देशित किया कि इन हितग्राहियों को सरकार की घोषणा के अनुसार रॉयल्टी मुक्त रेत हर हाल में मिलनी चाहिए। साथ ही, उन्होंने अधिकारियों को आगाह किया कि इस छूट की आड़ में कोई भी असामाजिक तत्व अवैध खनन की कोशिश न करे, इसकी निगरानी भी अनिवार्य है।
खदानों की नीलामी प्रक्रिया की समीक्षा करते हुए श्री दयानंद ने जिलों के प्रदर्शन में असमानता पर चिंता जताई। जहाँ गरियाबंद, कांकेर और जांजगीर-चांपा में लक्ष्य से अधिक नीलामी हुई, वहीं धमतरी और बिलासपुर जैसे जिलों में प्रगति काफी धीमी पाई गई। सचिव ने इस सुस्ती पर कड़ी नाराजगी जाहिर करते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल नई खदानों की नीलामी प्रक्रिया तेज करने का अल्टीमेटम दिया।
प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने के लिए सचिव ने ‘माइनिंग प्लान’ और ‘पर्यावरण स्वीकृति’ (EC) पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जिन घाटों की नीलामी हो चुकी है, उनकी कागजी कार्यवाही को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए। इसकी मॉनिटरिंग के लिए हर जिले में साप्ताहिक समीक्षा बैठक आयोजित करना अनिवार्य कर दिया गया है ताकि पर्यावरण नियमों का उल्लंघन न हो।
सचिव ने जिला प्रशासन की जवाबदेही तय करते हुए एक बड़ी चेतावनी भी दी। उन्होंने कहा कि यदि विभाग के केंद्रीय उड़नदस्ते को किसी जिले में कार्रवाई के लिए उतरना पड़ता है, तो यह माना जाएगा कि स्थानीय जिला प्रशासन और खनिज अधिकारी अपने कर्तव्यों के प्रति गंभीर नहीं हैं। उन्होंने इसे सीधे तौर पर लापरवाही की श्रेणी में रखने की बात कही, जिस पर मुख्यमंत्री पहले भी अप्रसन्नता व्यक्त कर चुके हैं।
तकनीकी निगरानी को बढ़ावा देते हुए सरकार अब ड्रोन सर्वे का भी सहारा लेगी। बैठक में बताया गया कि यदि ड्रोन सर्वे या केंद्रीय जांच दल को किसी भी क्षेत्र में अवैध उत्खनन के प्रमाण मिलते हैं, तो इसके लिए जिला कलेक्टर और संबंधित खनिज अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा। साक्ष्य मिलने पर उनके विरुद्ध कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
अंत में, सचिव ने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार का मुख्य उद्देश्य राजस्व की सुरक्षा और जनता को राहत पहुँचाना है। अवैध भंडारण और परिवहन को रोकने के लिए मीडिया में आने वाली खबरों और शिकायतों पर तत्काल एक्शन लेने के निर्देश दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ सरकार की यह सख्ती संकेत है कि आने वाले दिनों में प्रदेश में खनिज माफियाओं पर शिकंजा और भी कसने वाला है।

