छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित शराब घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जांच का दायरा बढ़ाते हुए बिलासपुर में बड़ी कार्रवाई की है। गुरुवार तड़के ईडी की टीम ने सराफा कारोबारी विवेक अग्रवाल के घर और उनके व्यावसायिक संस्थान ‘श्रीराम ज्वेलर्स’ पर एक साथ दबिश दी। इस छापेमारी का मुख्य उद्देश्य फरार चल रहे आरोपी विकास अग्रवाल उर्फ सुब्बू के वित्तीय निवेश और अवैध संपत्ति का सुराग लगाना था, जो इस घोटाले की एक अहम कड़ी माना जा रहा है।
दिनभर चली इस मैराथन जांच में ईडी के हाथ बड़ी कामयाबी लगी है। सूत्रों के मुताबिक, विवेक अग्रवाल के ठिकानों से करीब 17 किलो सोना और लगभग 3 करोड़ रुपये के हीरे के हार बरामद किए गए हैं। इसके अलावा बड़ी मात्रा में बेहिसाबी नकदी और निवेश से जुड़े दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं। अचानक हुई इस कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे और सीआरपीएफ के जवानों ने पूरे परिसर को अपनी निगरानी में ले रखा था।
इस रेड का सीधा संबंध शराब घोटाले के मास्टरमाइंड माने जाने वाले अनवर ढेबर से है। बताया जा रहा है कि विवेक अग्रवाल के भाई, विकास अग्रवाल, अनवर ढेबर के बेहद करीबी सहयोगी हैं। आरोप है कि शराब दुकानों से वसूला जाने वाला कमीशन और अवैध सिंडिकेट का पैसा विकास और विवेक अग्रवाल के माध्यम से ही रूट किया जाता था। विकास पिछले चार वर्षों से फरार है और उसे अदालत द्वारा वांटेड घोषित किया जा चुका है।

जांच एजेंसी को अंदेशा है कि शराब घोटाले से अर्जित काली कमाई को विवेक अग्रवाल के सराफा कारोबार में खपाया गया है। सदर बाजार स्थित उनकी ज्वेलरी शॉप के स्टॉक रजिस्टर, खरीद-बिक्री के रिकॉर्ड और पिछले कुछ वर्षों के वित्तीय लेनदेन की बारीकी से जांच की जा रही है। अधिकारियों का मानना है कि बरामद किए गए गहने और संपत्तियां दरअसल विकास अग्रवाल के छिपे हुए निवेश का हिस्सा हो सकते हैं।
मैग्नेटो मॉल के पास स्थित विवेक अग्रवाल के निवास पर हुई इस कार्रवाई ने शहर के व्यापारिक गलियारों में हड़कंप मचा दिया है। ईडी की टीम ने मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य डिजिटल उपकरणों को भी अपने कब्जे में ले लिया है, ताकि डिलीट किए गए डेटा और गुप्त चैट के जरिए घोटाले के नेटवर्क को डिकोड किया जा सके। अधिकारियों ने घर के सभी प्रवेश द्वारों को सील कर घंटों तक पूछताछ और दस्तावेजों का मिलान किया।
फिलहाल, ईडी बरामद दस्तावेजों और संपत्तियों का विस्तृत विवरण तैयार कर रही है। विकास अग्रवाल की तलाश में जुटी एजेंसी के लिए यह छापेमारी महत्वपूर्ण साबित हो सकती है, क्योंकि इससे सिंडिकेट के वित्तीय ढांचे को समझने में मदद मिलेगी। आने वाले दिनों में इस मामले में कुछ और प्रभावशाली लोगों की संलिप्तता और बड़ी गिरफ्तारियों की संभावना जताई जा रही है।

