रोहतक/नई दिल्ली: आधुनिक चिकित्सा और पुलिस प्रशासन के बेमिसाल तालमेल की एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने मानवता की नई परिभाषा लिख दी है। बीती 9 अप्रैल को हरियाणा के रोहतक से देश की राजधानी दिल्ली तक एक ‘ग्रीन कॉरिडोर’ बनाया गया, जिसके जरिए एक डोनर हार्ट को महज 85 मिनट में 98 किलोमीटर दूर अस्पताल पहुँचाया गया। यह सफर सिर्फ सड़कों का फासला तय करना नहीं था, बल्कि एक मरते हुए इंसान को जिंदगी की धड़कन देने की जद्दोजहद थी।
इस कहानी की शुरुआत रोहतक के पीजीआईएमएस (PGIMS) अस्पताल से हुई, जहाँ ब्रेन हेमरेज के बाद भर्ती एक 37 वर्षीय व्यक्ति को डॉक्टरों ने ‘ब्रेन डेड’ घोषित कर दिया था। भारी दुख के बीच भी उस व्यक्ति के परिवार ने एक अत्यंत साहसी और मानवीय निर्णय लिया—अंग दान का। परिवार की इस सहमति ने न केवल दिल्ली के एक युवक को जीवनदान दिया, बल्कि कई अन्य लोगों के लिए भी उम्मीद की किरण जगा दी।
जैसे ही अंग दान की प्रक्रिया पूरी हुई, प्रशासन तुरंत हरकत में आ गया। दिल्ली के ओखला स्थित फोर्टिस एस्कॉर्ट्स हार्ट इंस्टीट्यूट में भर्ती एक 26 साल का युवक, जो ‘डाइलेटेड कार्डियोमायोपैथी’ नाम की गंभीर बीमारी से जूझ रहा था, उसे इस दिल की सख्त जरूरत थी। डॉक्टरों के अनुसार, ट्रांसप्लांट ही उसकी आखिरी उम्मीद थी। समय की संवेदनशीलता को देखते हुए रोहतक और दिल्ली पुलिस ने मिलकर 98 किलोमीटर लंबा ‘ग्रीन कॉरिडोर’ तैयार किया ताकि एम्बुलेंस को कहीं भी ट्रैफिक का सामना न करना पड़े।
सामान्यतः रोहतक से दिल्ली की यह दूरी तय करने में दो घंटे से अधिक का समय लगता है, लेकिन पुलिस के कड़े इंतजामों और एम्बुलेंस चालक की मुस्तैदी की बदौलत यह फासला सिर्फ 85 मिनट में सिमट गया। सड़क पर हर गाड़ी को किनारे कर दिया गया और ट्रैफिक सिग्नल को बंद रखा गया, ताकि जीवन की यह ‘तेज दौड़’ बिना किसी रुकावट के पूरी हो सके। अस्पताल पहुँचते ही डॉक्टरों की टीम ने तुरंत सर्जरी शुरू कर दी, जो अंततः सफल रही।

उस डोनर का बलिदान सिर्फ एक दिल तक सीमित नहीं रहा। उनके फेफड़ों को गुरुग्राम के एक निजी अस्पताल भेजा गया, जबकि लीवर और पैंक्रियास को दिल्ली स्थित एम्स (AIIMS) पहुँचाया गया। वहीं, उनकी किडनी और कॉर्निया का उपयोग रोहतक के अस्पताल में ही जरूरतमंद मरीजों के लिए किया गया। इस प्रकार, एक व्यक्ति की मृत्यु के बाद भी उनके अंगों ने कई घरों के बुझते चिरागों को फिर से रौशन कर दिया।
यह घटना हमें याद दिलाती है कि अंग दान दुनिया का सबसे बड़ा दान है। जब तकनीक, चिकित्सा कौशल और प्रशासनिक तत्परता एक साथ मिलते हैं, तो मौत को मात दी जा सकती है। 26 वर्षीय युवक अब सुरक्षित है और उसकी धड़कनें उस अजनबी डोनर और उनके परिवार की महानता की गवाही दे रही हैं, जिन्होंने दर्द में भी दूसरों का भला सोचा।

