पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने एलपीजी उपभोक्ताओं के बीच ई-केवाईसी को लेकर चल रही उलझनों को स्पष्ट कर दिया है। मंत्रालय के अनुसार, ई-केवाईसी की प्रक्रिया केवल उन चुनिंदा ग्राहकों के लिए अनिवार्य है जिन्होंने इसे अब तक पूरा नहीं किया है, ताकि गैस वितरण प्रणाली में पारदर्शिता बनी रहे।
नियमों के मुताबिक, जो सामान्य उपभोक्ता (Non-PMUY) प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के अंतर्गत नहीं आते और अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया पहले ही पूरी कर चुके हैं, उन्हें दोबारा गैस एजेंसी जाने की कोई आवश्यकता नहीं है। यदि आपका बायोमेट्रिक डेटा पहले से रिकॉर्ड में अपडेटेड है, तो आपका मौजूदा कनेक्शन सुचारू रूप से चलता रहेगा।
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प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण अभी भी अनिवार्य है। सरकार का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सब्सिडी का लाभ केवल वास्तविक और पात्र लाभार्थियों तक ही पहुंचे। जिन उज्ज्वला लाभार्थियों ने अभी तक अपना आधार प्रमाणीकरण नहीं कराया है, उन्हें अपनी संबंधित गैस एजेंसी पर जाकर इसे पूरा करना होगा।
इस पूरी प्रक्रिया के जरिए सरकार फर्जी और एक ही नाम पर चल रहे कई अवैध कनेक्शनों की पहचान कर उन्हें हटाना चाहती है। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सरकार द्वारा दी जा रही राहत सीधे पात्र ग्राहक के बैंक खाते में पहुंचे और उपभोक्ता का डेटा पूरी तरह सुरक्षित और अपडेटेड रहे।
मंत्रालय ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर चल रही भ्रामक खबरों से न डरें। यदि आपका केवाईसी पहले से अपडेट है, तो आपकी गैस सप्लाई या सब्सिडी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ग्राहक अपनी स्थिति की जांच संबंधित गैस कंपनी के आधिकारिक मोबाइल ऐप जैसे IndianOil One, BharatGas, या HP Pay के जरिए भी कर सकते हैं।

