दशहरा का पर्व बीतने के साथ ही राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली और इसके आसपास के इलाकों (NCR) में मौसम का मिजाज तेजी से बदल गया है। तापमान में गिरावट के साथ ही एक बार फिर प्रदूषण ने अपनी वापसी दर्ज करा दी है। सुबह के समय शहर के कई हिस्सों में धुंध और स्मॉग की एक मोटी चादर साफ दिखाई दे रही है, जिससे विजिबिलिटी कम हो गई है और लोगों को सांस लेने में हल्की परेशानी महसूस होने लगी है। सर्दियों के आगमन से पहले ही हवा का इस तरह जहरीला होना चिंता का बड़ा विषय बन गया है।
मौसम में आए इस अचानक बदलाव के चलते दिल्ली का वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) इस सीजन में पहली बार गिरकर ‘खराब’ श्रेणी में पहुंच गया है। अधिकांश इलाकों में AQI का स्तर 200 से 300 के बीच दर्ज किया जा रहा है, जबकि कुछ संवेदनशील और घनी आबादी वाले क्षेत्रों में यह स्थिति और भी अधिक डरावनी बनी हुई है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए, तो आने वाले दिनों में यह हवा ‘गंभीर’ श्रेणी में भी जा सकती है।
प्रदूषण के इस नए दौर के पीछे कई प्रमुख कारण जिम्मेदार माने जा रहे हैं। सबसे बड़ा कारण मौसम में हो रहा बदलाव है, जिसमें न्यूनतम तापमान में गिरावट और हवा की बेहद धीमी गति शामिल है। हवा की गति कम होने के कारण वाहन से निकलने वाला धुआं, धूल और अन्य प्रदूषक तत्व वातावरण में ऊपर जाने के बजाय जमीन के करीब ही ठहर जाते हैं, जिससे घना स्मॉग तैयार होता है।
इसके अलावा, हाल ही में संपन्न हुए दशहरा उत्सव के दौरान हुई आतिशबाजी ने भी स्थिति को बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाई है। त्योहार के बाद आसमान में पटाखों के अवशेष और बारूद का धुआं घुल गया, जो वायुमंडल में लंबे समय तक टिका रहता है। इसके साथ ही, पड़ोसी राज्यों में धान की कटाई के बाद पराली जलाने की घटनाओं की शुरुआत ने भी दिल्ली की हवा में जहर घोलना शुरू कर दिया है।
प्रशासन और पर्यावरण से जुड़े विभागों द्वारा जारी एयर क्वालिटी अर्ली वार्निंग सिस्टम (AQEWS) के पूर्वानुमान ने लोगों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, आने वाले कुछ दिनों तक दिल्ली-एनसीआर की हवा से राहत मिलने की कोई खास उम्मीद नहीं है और यह ‘खराब’ श्रेणी में ही बनी रह सकती है। हवा की दिशा और गति अनुकूल न होने के कारण प्रदूषकों का फैलाव नहीं हो पा रहा है।
इस गंभीर स्थिति से निपटने के लिए अब सरकार और स्थानीय प्रशासन ने कमर कस ली है। विंटर एक्शन प्लान के तहत प्रदूषण नियंत्रण के विभिन्न उपायों को धरातल पर उतारने की तैयारी तेज कर दी गई है। इसके तहत सड़कों पर पानी का छिड़काव, निर्माण कार्यों पर कड़ी निगरानी, और डीजल वाहनों पर सख्ती जैसे कदम उठाए जा रहे हैं ताकि स्थिति को बिगड़ने से रोका जा सके।
कुल मिलाकर, हर साल की तरह इस बार भी सर्दी की शुरुआत के साथ दिल्लीवासियों को प्रदूषण के मोर्चे पर एक बड़ी चुनौती का सामना करना पड़ रहा है। मौसम की यह मार न केवल आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है, बल्कि बुजुर्गों और सांस के मरीजों के लिए भी खतरे की घंटी बजा रही है। ऐसे में नागरिकों को भी स्वास्थ्य के प्रति सतर्क रहने और प्रशासनिक नियमों का पालन करने की सलाह दी जा रही है।

