नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली की कमला मार्केट थाना पुलिस ने एक बेहद साहसिक और योजनाबद्ध कार्रवाई करते हुए जीबी रोड (स्वामी श्रद्धानंद मार्ग) पर चल रहे देह व्यापार और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्करी के एक बड़े नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। पुलिस ने इस गिरोह की मुख्य सरगना ‘कुमारी’ को गिरफ्तार कर लिया है, जो पिछले 15 वर्षों से अपने पति राहुल के साथ मिलकर इस अवैध धंधे को संगठित रूप से चला रही थी। जांच में यह अंदेशा जताया जा रहा है कि इस गिरोह के तार सीमा पार अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैले हुए हैं।
इस पूरे मामले का खुलासा तब हुआ जब पुलिस को पश्चिम बंगाल के आसनसोल से लापता एक 17 वर्षीय नाबालिग किशोरी के बारे में गोपनीय सूचना प्राप्त हुई। सूचना के मुताबिक, किशोरी को दिल्ली में अच्छी नौकरी दिलाने का झांसा देकर लाया गया था और फिर उसे कमला मार्केट स्थित एक कोठे पर बेच दिया गया। इस सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत एक विशेष टीम का गठन किया और बुधवार को जीबी रोड स्थित संदिग्ध ठिकानों पर छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान पुलिस ने कोठे से नाबालिग सहित कुल 8 युवतियों को मुक्त कराया। ये महिलाएं वहां अमानवीय परिस्थितियों में रहने और देह व्यापार के दलदल में धकेले जाने को मजबूर थीं। बचाई गई नाबालिग ने पुलिस को बताया कि उसे महज पांच दिन पहले ही ‘पिंकी’ नाम की एक महिला यहां लेकर आई थी और उसे कोठा संचालिका को बेच दिया गया था। पुलिस अब पिंकी और गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश में जुटी है।
गिरफ्तार की गई मुख्य आरोपी ‘कुमारी’ की कहानी भी बेहद चौंकाने वाली है। पुलिस पूछताछ में सामने आया कि वह खुद करीब 25 साल पहले एक यौन कर्मी के रूप में इस इलाके में आई थी। धीरे-धीरे उसने इस अवैध धंधे की बारीकियों को समझा और अपनी पकड़ मजबूत करते हुए खुद कोठा संचालिका बन गई। बाद में उसने राहुल नाम के एक बिचौलिए से शादी कर ली, जो तस्करी के नेटवर्क में उसका सबसे बड़ा सहयोगी बन गया और लड़कियों को लाने-ले जाने का काम संभालने लगा।
पुलिस को छापेमारी के दौरान सबसे बड़ा सबूत ‘काली डायरियों’ के रूप में मिला है। कोठे से कुल 8 डायरियां बरामद हुई हैं, जिनमें लगभग 500 युवतियों के नाम और उनसे प्रतिदिन होने वाली कमाई का पूरा ब्योरा दर्ज है। ये डायरियां इस बात का पुख्ता प्रमाण हैं कि यह कोई छोटा-मोटा धंधा नहीं, बल्कि करोड़ों रुपये का एक संगठित आर्थिक साम्राज्य था, जिसे बहुत ही पेशेवर तरीके से चलाया जा रहा था।
इस नेटवर्क की व्यावसायिकता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि कुमारी ने हिसाब-किताब रखने के लिए नेपाल के दो प्रबंधकों, गोपीराम और लुमाकांत को वेतन पर रखा हुआ था। ये दोनों मैनेजर नियमित रूप से नेटवर्क की आय और व्यय का रिकॉर्ड तैयार करते थे। पूछताछ में सरगना कुमारी ने यह भी कबूला कि वह लड़कियों को लाने वाले एजेंटों को प्रति लड़की 10 हजार से 30 हजार रुपये तक का मोटा कमीशन देती थी।
जांच में यह भी पता चला है कि इस गिरोह का जाल देश के पिछड़े राज्यों जैसे असम, पश्चिम बंगाल, झारखंड और पड़ोसी देश नेपाल के ग्रामीण इलाकों तक फैला हुआ था। मुख्य एजेंट ‘पिंकी’ के साथ मिलकर 100 से अधिक एजेंट सक्रिय थे, जो गरीब और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की लड़कियों को ‘घरेलू काम’ या ‘अच्छी तनख्वाह’ का लालच देकर दिल्ली लाते थे। दिल्ली पहुंचते ही इन मासूमों को कोठों पर बेच दिया जाता था।
रेस्क्यू की गई युवतियों में 6 पश्चिम बंगाल की, 1 नेपाल की और 1 मेरठ की रहने वाली है। इन महिलाओं की आपबीती सुनकर पुलिस अधिकारी भी दंग रह गए। कई पीड़िताओं ने बताया कि उन्हें जबरन इस धंधे में रखा गया और विरोध करने पर उनके साथ मारपीट की जाती थी। उन्हें सूरज की रोशनी तक देखना नसीब नहीं होता था और बेहद छोटे-छोटे केबिनों में उन्हें कैद कर रखा जाता था ताकि वे पुलिस की नजरों से बची रहें।
एक पीड़िता, जिसे रंजना (परिवर्तित नाम) बताया गया है, उसने रोते हुए अपनी आपबीती सुनाई। वह अपने परिवार की आर्थिक तंगी दूर करने के लिए मेदिनीपुर से दिल्ली आई थी। उसे डरा-धमकाकर इस धंधे में धकेल दिया गया और वह अपने परिवार को पैसे भेजने की मजबूरी के कारण इस नर्क से नहीं निकल सकी। वहीं, दुर्गापुर की संगीता (परिवर्तित नाम) अपने बच्चों के भविष्य के लिए काम की तलाश में आई थी, लेकिन उसे भी धोखे से यहां बेच दिया गया।
पुलिस वर्तमान में सभी पीड़िताओं के बयान अदालत में दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 164 के तहत दर्ज करवा रही है। इन बयानों को मामले में सबसे अहम सबूत माना जाएगा, जिसके आधार पर एफआईआर में मानव तस्करी और POCSO एक्ट जैसी गंभीर धाराएं जोड़ी जाएंगी। पुलिस का मानना है कि इन बयानों से गिरोह के अन्य सहयोगियों और फरार एजेंटों के खिलाफ कानूनी शिकंजा और भी मजबूत होगा।
फिलहाल, बचाई गई सभी युवतियों को सुरक्षित शेल्टर होम भेज दिया गया है, जहां उन्हें चिकित्सा सहायता और मनोवैज्ञानिक परामर्श दिया जा रहा है। दिल्ली पुलिस अब फरार आरोपी राहुल और मुख्य एजेंट पिंकी की गिरफ्तारी के लिए अंतरराज्यीय स्तर पर छापेमारी कर रही है। पुलिस को उम्मीद है कि इस कार्रवाई के बाद जीबी रोड पर चल रहे अन्य अवैध कोठा संचालकों और मानव तस्करों के नेटवर्क पर भी लगाम कसी जा सकेगी।

