जशपुर/रायपुर: छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने आज जशपुर के रणजीता स्टेडियम से राज्य की एक अत्यंत महत्वाकांक्षी योजना “मोर गांव, मोर पानी, मोर तरिया महाअभियान” का विधिवत शुभारंभ किया। जल संरक्षण और ग्रामीण विकास के मेल वाली इस अनूठी पहल के अंतर्गत मुख्यमंत्री ने “नवा तरिया, आय के जरिया” कार्यक्रम के तहत प्रदेश में 500 नए तालाबों के निर्माण का शिलान्यास भी किया। इस अभियान का प्राथमिक उद्देश्य न केवल जल संचयन करना है, बल्कि गिरते भूजल स्तर को सुधारते हुए कृषि कार्यों के लिए सिंचाई की पुख्ता व्यवस्था सुनिश्चित करना है।
मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि जल ही जीवन का मूल आधार है और इसे सहेजना अब एक सामाजिक जिम्मेदारी बननी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अभियान के माध्यम से जल संरक्षण को एक ‘जन आंदोलन’ का रूप दिया जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि गांव-गांव में पानी की उपलब्धता बढ़े, जिससे न केवल किसानों की फसलों को सुरक्षा मिले, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव भी सुदृढ़ हो सके। उन्होंने इसे ग्रामीण भारत के लिए खुशहाली का नया रास्ता बताया।
अभियान की प्रारंभिक सफलता का उल्लेख करते हुए रिपोर्ट में बताया गया कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत इस महाअभियान ने रिकॉर्ड उपलब्धि हासिल की है। जहां प्रशासन ने पूरे प्रदेश में 10,000 आजीविका डबरी निर्माण का लक्ष्य रखा था, वहीं विभाग ने अपनी कर्मठता से 15 अप्रैल 2026 तक ही 13,000 से अधिक डबरियों का निर्माण कार्य पूर्ण कर लिया है। यह आंकड़े दर्शाते हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में इस योजना को लेकर कितना उत्साह है और इसकी गति कितनी प्रभावी है।
आजीविका के मोर्चे पर बात करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ये डबरियां केवल पानी के गड्ढे नहीं हैं, बल्कि आय के बहुउद्देशीय केंद्र हैं। इनके माध्यम से ग्रामीण अब मत्स्य पालन, बत्तख पालन, सिंघाड़ा उत्पादन और सब्जी उत्पादन जैसी गतिविधियों से जुड़ सकेंगे। इसके अतिरिक्त, डबरियों के किनारे वृक्षारोपण को भी बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे हितग्राही परिवारों को अतिरिक्त आमदनी के अवसर प्राप्त होंगे। सरकार का मानना है कि इससे ग्रामीण स्तर पर पलायन रुकेगा और लोग आत्मनिर्भर बनेंगे।
महिला सशक्तिकरण की दिशा में भी यह अभियान एक मिसाल पेश कर रहा है। योजना के क्रियान्वयन में स्व-सहायता समूहों की महिलाओं की भागीदारी को अनिवार्य बनाया गया है। एक प्रगतिशील कदम उठाते हुए, शासन ने निर्णय लिया है कि आजीविका डबरी से जुड़े नागरिक सूचना पटल पर परिवार की महिला सदस्य का नाम प्रमुखता से अंकित किया जाएगा। यह पहल ग्रामीण समाज में महिलाओं के स्वामित्व और उनके अधिकारों को वैधानिक व सामाजिक मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से ली गई है।
योजना की पारदर्शिता और निगरानी के लिए आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जा रहा है। ग्राम सभाओं की स्वीकृति और उन्नत तकनीकी मापदंडों के आधार पर ही कार्यों को मंजूरी दी जा रही है। आम नागरिकों तक जानकारी पहुँचाने के लिए दीवार लेखन, बैनर और क्यूआर कोड (QR Code) जैसे माध्यमों का उपयोग किया जा रहा है। सोशल मीडिया के जरिए भी इस महाअभियान का व्यापक प्रचार किया जा रहा है ताकि अंतिम छोर पर बैठा व्यक्ति भी इसका लाभ उठा सके।
इस ऐतिहासिक अवसर पर प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री विजय शर्मा सहित कई गणमान्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम में पत्थलगांव विधायक श्रीमती गोमती साय, जशपुर विधायक श्रीमती रायमुनी भगत और छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार मंडल के अध्यक्ष श्री रामप्रताप सिंह ने भी अपनी सहभागिता दर्ज कराई। सामूहिक सहभागिता और जन-समर्थन के बीच शुरू हुआ यह अभियान जशपुर सहित पूरे छत्तीसगढ़ में जल संरक्षण के क्षेत्र में एक नई क्रांति लाने की ओर अग्रसर है।

