रायपुर/सक्ती: छत्तीसगढ़ के नवनिर्मित सक्ती जिले से एक हृदयविदारक खबर सामने आई है, जहाँ डभरा तहसील के सिंघीतराई स्थित वेदांता पावर प्लांट में एक भीषण तकनीकी हादसे ने 20 श्रमिकों की जान ले ली। यह दुर्घटना 14 अप्रैल को प्लांट की बॉयलर यूनिट-1 में हुई, जहाँ स्टीम पाइप से जुड़े वाटर सप्लाई पाइप के ज्वाइंट में अचानक तकनीकी खराबी आ गई। इस खराबी के कारण हुआ धमाका इतना जबरदस्त था कि वहां काम कर रहे श्रमिक इसकी चपेट में आ गए, जिससे मौके पर ही भारी अफरा-तफरी मच गई।
इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 श्रमिकों की मृत्यु की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 15 अन्य श्रमिक गंभीर रूप से झुलस गए हैं। घायलों को तत्काल स्थानीय और निजी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है, जहाँ कई की स्थिति अब भी नाजुक बनी हुई है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की टीमें घायलों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में जुटी हुई हैं। इस घटना ने औद्योगिक सुरक्षा मानकों और प्लांट प्रबंधन की देखरेख पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिससे स्थानीय ग्रामीणों और मजदूर संगठनों में भारी आक्रोश व्याप्त है।
राज्य सरकार ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल उच्च स्तरीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग द्वारा जारी आदेश के तहत बिलासपुर संभाग के आयुक्त, सुनील जैन को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया है। उन्हें विशेष रूप से निर्देशित किया गया है कि वे घटना के हर तकनीकी और प्रशासनिक पहलू की सूक्ष्मता से जांच करें। शासन ने इस जांच के लिए 30 दिनों की सख्त समय-सीमा निर्धारित की है, जिसके भीतर जांच अधिकारी को अपनी विस्तृत रिपोर्ट राज्य सरकार के समक्ष प्रस्तुत करनी होगी।
जांच के लिए निर्धारित बिंदुओं में मुख्य रूप से यह पता लगाया जाएगा कि घटना किन परिस्थितियों में और कैसे घटित हुई। क्या यह केवल एक तकनीकी विफलता थी या इसके पीछे प्रबंधन की लापरवाही और खराब मेंटेनेंस जिम्मेदार था? इसके साथ ही, जांच अधिकारी को भविष्य में इस तरह की जानलेवा घटनाओं को रोकने के लिए ठोस सुरक्षा उपायों और प्रोटोकॉल पर भी अपनी सिफारिशें देनी होंगी। सरकार का लक्ष्य है कि इस रिपोर्ट के माध्यम से औद्योगिक क्षेत्रों में सुरक्षा के एक नए मानक स्थापित किए जा सकें।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए इसे एक अपूरणीय क्षति बताया है। उन्होंने दिवंगत श्रमिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके शोकाकुल परिजनों के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने यह भी भरोसा दिलाया है कि इस लापरवाही के लिए जो भी जिम्मेदार पाया जाएगा, चाहे वह कितना भी रसूखदार क्यों न हो, उसके खिलाफ कठोरतम कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
फिलहाल, प्लांट परिसर में तनावपूर्ण स्थिति को देखते हुए सुरक्षा बल तैनात कर दिए गए हैं और बॉयलर यूनिट को पूरी तरह सील कर दिया गया है। क्षेत्रीय प्रशासन मृतक श्रमिकों के परिजनों को उचित मुआवजा दिलाने और घायलों की सहायता के लिए प्रबंधन से समन्वय कर रहा है। आने वाले दिनों में जांच रिपोर्ट के नतीजों पर सबकी नजरें टिकी होंगी, क्योंकि यह छत्तीसगढ़ के औद्योगिक इतिहास के सबसे बड़े हादसों में से एक माना जा रहा है।

