छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से सामने आया यह कोयला घोटाला औद्योगिक जगत और प्रशासन के लिए एक बड़ा झटका है। पुसौर ब्लॉक स्थित NTPC लारा प्लांट में हुआ यह भ्रष्टाचार न केवल आर्थिक नुकसान की कहानी कहता है, बल्कि यह भी दर्शाता है कि कैसे सुनियोजित तरीके से सरकारी संसाधनों की चोरी की जा सकती है। रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 575 ट्रेलर कोयला खदान से निकलने के बावजूद प्लांट के गेट तक कभी पहुँचा ही नहीं, जिससे करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ है।
यह पूरा मामला लगभग तीन साल पुराना बताया जा रहा है, जिसकी जड़ें तलाईपाली माइंस में कोयला उत्पादन की कमी से जुड़ी हैं। उस समय प्लांट की जरूरतों को पूरा करने के लिए अन्य खदानों से सड़क मार्ग के जरिए कोयले की आपूर्ति सुनिश्चित की गई थी। इसी दौरान ट्रांसपोर्टरों और एनटीपीसी के कुछ भ्रष्ट अधिकारियों ने मिलकर एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया, जिसमें कोयला कागजों पर तो रवाना हुआ, लेकिन वास्तविकता में उसे रास्ते में ही खपा दिया गया।
घोटाले का खुलासा तब हुआ जब एनटीपीसी के वित्तीय प्रबंधन विभाग ने कोयले के स्टॉक और भुगतान के रिकॉर्ड की बारीकी से जांच की। जांच टीम ने जब खदान से जारी हुए ट्रकों की संख्या और प्लांट के गेट पर हुई एंट्री का मिलान किया, तो आंकड़ों में भारी विसंगति पाई गई। दस्तावेजी साक्ष्यों के अनुसार, 28 अप्रैल 2023 से 22 मई 2024 के बीच रिकॉर्ड में दर्ज 575 वाहन कभी प्लांट परिसर के अंदर दाखिल ही नहीं हुए थे।
इस मामले में सबसे चौंकाने वाला पहलू सुरक्षा व्यवस्था पर उठने वाले सवाल हैं। एनटीपीसी लारा जैसे संवेदनशील और महत्वपूर्ण संस्थान की सुरक्षा की कमान CISF (केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल) के हाथों में है। प्लांट के प्रवेश द्वार पर हर छोटे-बड़े वाहन की सघन चेकिंग और एंट्री रजिस्टर में दर्ज की जाती है। ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी बड़ी संख्या में वाहनों की हेराफेरी बिना सुरक्षा तंत्र की मिलीभगत या बड़ी लापरवाही के कैसे संभव हो पाई?
विजिलेंस टीम की शुरुआती जांच में यह भी पाया गया कि अकेले अक्टूबर 2023 के महीने में ही 154 ट्रेलर कोयला गायब हुआ था। इतनी बड़ी मात्रा में कोयले की चोरी ने प्रबंधन के होश उड़ा दिए, जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंप दिया गया। सीबीआई ने अब इस प्रकरण में एनटीपीसी के पांच अधिकारियों और संबंधित ट्रांसपोर्ट कंपनियों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर ली है।
सीबीआई की जांच के रडार पर अब वे ट्रांसपोर्टर हैं जिन्हें परिवहन का ठेका दिया गया था, साथ ही वे अधिकारी भी हैं जो कोयले की तौल और रसीद सत्यापन कार्य में तैनात थे। जांच एजेंसी ने संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर पूछताछ शुरू कर दी है। सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ बड़ी गिरफ्तारियां हो सकती हैं और कई प्रभावशाली लोगों के नाम इस सिंडिकेट से जुड़ सकते हैं।
एनटीपीसी लारा के जनसंपर्क अधिकारी बी.पी. साहू ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि मामला करीब तीन साल पुराना है और सीबीआई पिछले छह महीनों से सक्रियता से इसकी जांच कर रही है। हालांकि, मामला अभी विचाराधीन और जांच के दायरे में है, इसलिए प्रबंधन ने वर्तमान में विस्तृत टिप्पणी करने से परहेज किया है। लेकिन यह स्पष्ट है कि इस खुलासे के बाद से विभाग के भीतर और ट्रांसपोर्टरों के बीच हड़कंप मचा हुआ है।
अंततः, यह घटना छत्तीसगढ़ में कोयला परिवहन की मौजूदा प्रणाली और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। यह केवल एक आर्थिक अपराध नहीं है, बल्कि यह ऊर्जा क्षेत्र की सुरक्षा और पारदर्शिता में एक बड़ी सेंध है। अब सबकी निगाहें सीबीआई की अंतिम रिपोर्ट पर टिकी हैं, जिससे यह साफ हो पाएगा कि इस “काले खेल” का असली मास्टरमाइंड कौन है और गायब हुआ कोयला आखिर कहां बेचा गया।

