नासिक के टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) में सामने आए कथित जबरन धर्मांतरण और यौन उत्पीड़न मामले में पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। मामले की मुख्य आरोपियों में से एक, निदा खान को पुलिस ने 7 मई की देर रात छत्रपति संभाजी नगर (औरंगाबाद) के नारेगांव इलाके से गिरफ्तार कर लिया है। निदा पिछले 25 दिनों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रही थी। पुलिस ने उसे एक फ्लैट से हिरासत में लिया, जहाँ वह अपने चार रिश्तेदारों के साथ छिपी हुई थी।
गिरफ्तारी से पहले निदा खान ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए हर संभव कोशिश की थी। उसने कोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की थी और अपनी गर्भावस्था का हवाला देते हुए राहत मांगी थी। हालांकि, अदालत ने उसकी दलीलों को खारिज कर दिया था। अदालत ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा था कि यह मामला किसी गहरी साजिश का हिस्सा लगता है, जिसमें सुनियोजित तरीके से महिला कर्मचारियों का ‘ब्रेनवॉश’ कर उन्हें धर्म परिवर्तन के लिए उकसाया गया और उन्हें विदेश (मलेशिया) भेजने की योजना बनाई गई थी।
निदा खान पर आरोप बेहद गंभीर हैं। जांच में सामने आया है कि उसने कंपनी में काम करने वाली हिंदू लड़कियों का मानसिक शोषण किया और उन पर बुर्का पहनने व इस्लाम अपनाने के लिए दबाव बनाया। पुलिस अब उन चार रिश्तेदारों की भूमिका की भी जांच कर रही है, जो गिरफ्तारी के वक्त निदा के साथ फ्लैट में मौजूद थे। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि क्या इन रिश्तेदारों को निदा के खिलाफ दर्ज मामलों की जानकारी थी और क्या उन्होंने जानबूझकर एक अपराधी को शरण दी थी।
इस पूरे प्रकरण की संवेदनशीलता को देखते हुए नासिक पुलिस की स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) मामले की गहराई से जांच कर रही है। अब तक इस मामले में कुल 9 एफआईआर (FIR) दर्ज की जा चुकी हैं, जो मुख्य रूप से महिला कर्मचारियों के साथ हुए यौन उत्पीड़न और जबरन धर्म परिवर्तन के प्रयासों से जुड़ी हैं। निदा की गिरफ्तारी के बाद पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ में कई नए खुलासे होंगे, खासकर उन ‘विदेशी कनेक्शनों’ को लेकर जिनके जरिए इस नेटवर्क को संचालित किया जा रहा था।
मामले में अब तक कुल 8 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। निदा से पहले गिरफ्तार हुए चार मुख्य आरोपियों—रजा रफीक मेमन, तौसीफ बिलाल अत्तार, दानिश शेख और शाहरुख हुसैन शौकत कुरैशी—को कोर्ट ने 18 मई तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। इन आरोपियों पर भी गंभीर आरोप हैं; जैसे दानिश शेख पर शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप है, वहीं तौसीफ पर आरोप है कि उसने पीड़ित लड़कियों को ब्लैकमेल कर उन पर यौन संबंध बनाने का दबाव डाला था।
पुलिस के अनुसार, यह केवल कार्यस्थल पर उत्पीड़न का मामला नहीं है, बल्कि इसके तार एक बड़े सिंडिकेट से जुड़े हो सकते हैं। एसआईटी अब निदा खान के मोबाइल फोन और अन्य डिजिटल उपकरणों की फॉरेंसिक जांच कर रही है। पुलिस यह भी देख रही है कि क्या इन कर्मचारियों को किसी खास मिशन के तहत निशाना बनाया गया था। निदा को ट्रांजिट वारंट के जरिए नासिक लाया जा रहा है, जहां उसे स्थानीय अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड की मांग करेगी ताकि आगे की पूछताछ की जा सके।
नासिक टीसीएस के इस मामले ने कॉर्पोरेट जगत और समाज में सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है। जिस तरह से एक प्रतिष्ठित कंपनी के नाम का सहारा लेकर धर्मांतरण और शोषण का खेल खेला गया, उसने प्रशासन को भी चौकन्ना कर दिया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि आने वाले दिनों में कुछ और गिरफ्तारियां संभव हैं और इस मामले में शामिल ‘व्हाइट कॉलर’ अपराधियों के चेहरों से भी नकाब हट सकता है। फिलहाल, निदा खान की गिरफ्तारी को इस केस का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है।

