देश की राजधानी दिल्ली से एक अत्यंत विचलित करने वाली खबर सामने आई है, जहाँ एक युवा और होनहार न्यायिक अधिकारी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली है। दिल्ली न्यायिक सेवा के अधिकारी और कड़कड़डूमा कोर्ट में तैनात जज अमन कुमार शर्मा ने दक्षिण दिल्ली के सफदरजंग एन्क्लेव स्थित अपने आवास पर फांसी लगाकर अपनी जीवन लीला समाप्त कर ली। इस घटना की जानकारी मिलते ही न्यायिक जगत और पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है।
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, घटना की सूचना शनिवार दोपहर करीब 1:45 बजे एक पीसीआर कॉल के माध्यम से मिली। बताया जा रहा है कि यह कॉल जज के परिवार के ही किसी सदस्य ने की थी, जिन्होंने उन्हें घर के भीतर मृत अवस्था में पाया। सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और फोरेंसिक विशेषज्ञों की टीम मौके पर पहुँची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। शुरुआती जांच में यह मामला आत्महत्या का ही नजर आ रहा है।
अमन कुमार शर्मा के करियर पर नजर डालें तो वह एक मेधावी छात्र और ऊर्जावान जज के रूप में जाने जाते थे। उन्होंने साल 2018 में पुणे के प्रतिष्ठित सिम्बायोसिस लॉ स्कूल से अपनी वकालत की पढ़ाई पूरी की थी और 19 जून 2021 को दिल्ली न्यायिक सेवा (DJS) का हिस्सा बने थे। अक्टूबर 2025 से वह कड़कड़डूमा कोर्ट में उत्तर-पूर्व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA) में पूर्णकालिक सचिव के पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे।

इस मामले में सबसे रहस्यमयी बात यह है कि पुलिस को अभी तक घटनास्थल से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। बिना किसी लिखित दस्तावेज के पुलिस के लिए आत्महत्या के कारणों की सटीक पुष्टि करना फिलहाल चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। अधिकारी उनके मोबाइल फोन, लैपटॉप और अन्य व्यक्तिगत सामानों की जांच कर रहे हैं ताकि इस आत्मघाती कदम के पीछे की किसी भी संभावित वजह का सुराग मिल सके।
वर्तमान में सफदरजंग थाना पुलिस इस मामले की हर कोण से जांच कर रही है। हालांकि पुलिस के आला अधिकारियों का कहना है कि शुरुआती तौर पर इसमें किसी बाहरी साजिश या ‘फाउल प्ले’ के संकेत नहीं मिले हैं, लेकिन परिवार के सदस्यों और उनके सहकर्मियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह जानने की कोशिश कर रही है कि क्या वह पिछले कुछ समय से किसी प्रकार के मानसिक तनाव या पेशेवर दबाव में थे।
इतनी कम उम्र के एक न्यायाधीश द्वारा उठाए गए इस कदम ने दिल्ली के कानूनी गलियारों में शोक की लहर दौड़ा दी है। उनके सहयोगियों और परिचितों के लिए इस खबर पर विश्वास करना कठिन हो रहा है। फिलहाल, सभी को पुलिस की विस्तृत जांच रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे यह साफ हो सके कि आखिर किस मजबूरी ने एक न्याय देने वाले अधिकारी को मौत को गले लगाने पर मजबूर कर दिया।

