सऊदी अरब के पवित्र मुस्लिम शहर मक्का और उसके आसपास के क्षेत्रों पर यमन के हूती विद्रोहियों द्वारा मिसाइल और ड्रोन से हमले किए जाने की घटना ने मध्य पूर्व की राजनीति में भारी हलचल पैदा कर दी है। इस दुस्साहसिक हमले के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव अपने चरम पर पहुंच गया है, क्योंकि दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की आस्था का केंद्र माने जाने वाले इस शहर को निशाना बनाना एक बेहद संवेदनशील और गंभीर मुद्दा है।
इस गंभीर खतरे से निपटने के लिए सऊदी अरब की वायु रक्षा प्रणाली (Air Defense System) को पूरी तरह से सक्रिय कर दिया गया था। सऊदी-नीत गठबंधन सेना ने मुस्तैदी दिखाते हुए मक्का के पवित्र शहर की प्रतिबंधित और संवेदनशील वायु सीमा में प्रवेश करने से पहले ही मक्का के दक्षिण क्षेत्र में एक विस्फोटक से लदे हूती ड्रोन को हवा में ही रोककर पूरी तरह नष्ट कर दिया।
सऊदी अरब के इतिहास में यह एक अभूतपूर्व और बेहद दुर्लभ मौका था, जब सुरक्षा को लेकर आपातकालीन चेतावनी जारी की गई। बढ़ते खतरे की आशंका को भांपते हुए सऊदी सिविल डिफेंस ने मक्का के साथ-साथ जेद्दा और ताएफ जैसे प्रमुख पश्चिमी शहरों में भी एयर रेड और इमरजेंसी अलर्ट सक्रिय कर दिए, जिससे स्थानीय नागरिकों और तीर्थयात्रियों में हड़कंप मच गया था।
हालाँकि, वायु रक्षा प्रणाली की मुस्तैदी और खतरे के सफलतापूर्वक टल जाने के बाद स्थिति सामान्य हो गई और आपातकालीन चेतावनियों को वापस ले लिया गया। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान किसी भी प्रकार के बड़े जान-माल के नुकसान या पवित्र स्थलों को क्षति पहुँचने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, जिससे प्रशासन और आम जनता ने बड़ी राहत की सांस ली है।
इस कायराना हरकत पर सऊदी गठबंधन सेना ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। गठबंधन के प्रवक्ता मेजर जनरल तुर्की अल-मलिकी ने प्रेस को संबोधित करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस्लाम के सबसे पवित्र स्थलों और वहाँ आने वाले लाखों तीर्थयात्रियों की सुरक्षा देश के लिए एक ‘रेड लाइन’ है, और यदि इस सुरक्षा को पार करने का प्रयास किया गया, तो इसका बहुत ही भयानक और करारा जवाब दिया जाएगा।
दूसरी ओर, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते दबाव को देखते हुए हूती विद्रोहियों के राजनीतिक ब्यूरो के वरिष्ठ अधिकारियों ने सीधे तौर पर मक्का को निशाना बनाने के दावों से किनारा कर लिया है। हूती गुट के प्रवक्ताओं ने इन खबरों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है, लेकिन इसके बावजूद उनके लड़ाकों द्वारा सऊदी अरब के विभिन्न अन्य सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचों पर हमलों का सिलसिला लगातार जारी है।
इस घटना के बाद से खाड़ी देशों की तमाम सुरक्षा एजेंसियां और खुफिया तंत्र पूरी तरह से हाई अलर्ट मोड पर आ गए हैं। विश्लेषकों का मानना है कि यमन संकट के समाधान के लिए चल रही शांति वार्ताओं के बीच इस तरह के हमले शांति प्रक्रिया को भारी नुकसान पहुँचा सकते हैं और आने वाले दिनों में यह संघर्ष और अधिक व्यापक रूप ले सकता है।

