दुर्ग। स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) के अंतर्गत आने वाले भिलाई स्टील प्लांट (BSP) में आज एक बड़ा हादसा हो गया। प्लांट के पीबीएस-2 (PBS-2) यूनिट में अचानक आग लगने से पूरे परिसर में हड़कंप मच गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, टर्बाइन में जोरदार धमाका हुआ, जिसके बाद आग ने विकराल रूप धारण कर लिया। घटना की सूचना मिलते ही दमकल की आधा दर्जन से अधिक गाड़ियां और संयंत्र के उच्च अधिकारी मौके पर पहुंचे और राहत कार्य शुरू किया।
हादसे के दौरान वहां मौजूद कर्मचारी और ठेका श्रमिक आग की लपटों के बीच फंस गए थे। चारों तरफ धुएं का गुबार होने के कारण बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं सूझ रहा था। घबराहट में कुछ मजदूर छत की ओर भागे, लेकिन वहां भी दम घोंटू धुएं ने उन्हें घेर लिया। अंततः, अपनी जान बचाने के लिए मजदूरों ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए खिड़की से केबल बांधा और उसके सहारे बारी-बारी से नीचे टीन शेड पर उतरे। इस साहसी प्रयास की वजह से एक बड़ी जनहानि टल गई।

इस अग्निकांड में कुल 8 से 9 लोग घायल हुए हैं, जिनमें नियमित कर्मचारी और ठेका श्रमिक दोनों शामिल हैं। केबल के सहारे उतरने के दौरान रगड़ लगने से कई मजदूरों की हथेलियां बुरी तरह छिल गई हैं। वहीं, एक नियमित कर्मचारी का पैर फ्रैक्चर होने की खबर है। सभी घायलों को तत्काल संयंत्र के मेन मेडिकल पोस्ट ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें बेहतर इलाज के लिए सेक्टर-9 हॉस्पिटल रेफर कर दिया गया है।
अस्पताल में भर्ती घायलों की पहचान कीर्ति कुमार भगत, महेंद्र कुशवाहा, महेंद्र जायसवाल, वैभव, ओमेंद्र कुमार तिस्दा, सुशांत, मनीष, अवधेश और शिव मोहन त्रिपाठी के रूप में हुई है। डॉक्टरों की टीम घायलों का एक्सरे और ईसीजी (ECG) कर उनकी स्थिति पर नजर बनाए हुए है। फिलहाल सभी की स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है, हालांकि कुछ कर्मचारियों को गहरे जख्म आए हैं।
प्लांट प्रबंधन ने घटना की जांच के आदेश दे दिए हैं। हालांकि प्राथमिक तौर पर आग लगने का कारण टर्बाइन में हुआ ब्लास्ट बताया जा रहा है, लेकिन आधिकारिक रूप से अभी पुष्टि होना बाकी है। इस घटना ने एक बार फिर औद्योगिक संयंत्रों में सुरक्षा मानकों और आपातकालीन निकासी व्यवस्थाओं पर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रबंधन अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि ब्लास्ट तकनीकी खराबी के कारण हुआ या इसके पीछे कोई अन्य मानवीय चूक थी।

