दुनिया के कुछ हिस्सों में चल रहे तनावपूर्ण हालातों की वजह से फ्यूल सप्लाई पर बुरा असर पड़ा है। इसे देखते हुए भारत के पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय ने घरेलू LPG गैस सिलेंडर की बुकिंग का नियम में कुछ बदलाव किया है। मंत्रालय ने तेल कंपनियों और रिफाइनरीज को साफ निर्देश दिए हैं कि वे अब एलपीजी का ज्यादा प्रोडक्शन करें। इस बढ़े हुए प्रोडक्शन का इस्तेमाल मुख्य रूप से घरेलू गैस की जरूरतों को पूरा करने के लिए किया जाएगा ताकि आम जनता को रसोई गैस की कमी महसूस न हो।
बुकिंग के नियमों में बड़ा बदलाव –
केंद्र सरकार के पेट्रोलियम मंत्रालय और प्रमुख ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) ने गैस वितरण व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के लिए नियमों में बड़ा बदलाव किया है। अब घरेलू गैस उपभोक्ताओं को एक सिलेंडर की डिलीवरी मिलने के बाद अगला सिलेंडर बुक करने के लिए कम से कम 25 दिनों का इंतजार करना होगा। पहले यह समय सीमा 21 दिनों का था , जिसे अब बढ़ाकर 25 दिन कर दिया गया है। सरकार ने अपने सॉफ्टवेयर सिस्टम में भी यह बदलाव लागू कर दिया है, जिससे 25 दिन की अवधि पूरी होने से पहले की गई कोई भी बुकिंग सिस्टम द्वारा स्वतः ब्लॉक कर दी जाएगी।
सरकार द्वारा यह कड़ा फैसला हाल के दिनों में सामने आई पैनिक बुकिंग और गैस सिलेंडरों की जमाखोरी की शिकायतों के बाद लिया गया है। आंकड़ों के अनुसार, जो उपभोक्ता पहले औसतन 50 से 55 दिनों में सिलेंडर बुक करते थे, वे अचानक 15 से 20 दिनों के भीतर ही बुकिंग करने लगे थे। इस प्रवृत्ति के कारण बाजार में कृत्रिम कमी की स्थिति बनने लगी थी और जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण हो गया था। ब्लैक मार्केटिंग और जमाखोरी पर लगाम लगाने के साथ-साथ ईंधन के निष्पक्ष वितरण के उद्देश्य से ही इस 25 दिनों के अंतराल वाले नियम को अनिवार्य बनाया गया है।
अस्पतालों और स्कूलों को मिलेगी प्राथमिकता –
पेट्रोलियम मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए अपने पोस्ट में साफ किया है कि उनकी पहली प्राथमिकता घरेलू इस्तेमाल और देश के जरूरी संस्थानों को गैस पहुंचाना है। बाहर से मंगाई जाने वाली यानी इंपोर्टेड एलपीजी की सप्लाई अब सबसे पहले अस्पतालों और शिक्षण संस्थानों जैसे जरूरी नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर को दी जाएगी। सरकार का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि देश की सेहत और शिक्षा से जुड़ी व्यवस्थाओं में गैस की कमी के कारण कोई रुकावट न आए।
होटल और इंडस्ट्रीज के लिए बनेगी कमेटी –
बाकी दूसरे नॉन-डोमेस्टिक सेक्टर, जैसे कि रेस्टोरेंट्स, होटल और बड़ी इंडस्ट्रीज के लिए गैस सप्लाई के नियम थोड़े अलग रखे गए हैं। इन सेक्टर्स को कितनी और कैसे गैस सप्लाई दी जाएगी, इसके लिए एक खास कमेटी बनाई गई है। इस कमेटी में ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) के तीन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर्स शामिल होंगे। यह कमेटी अलग-अलग इंडस्ट्रीज की डिमांड और उनके आवेदन को रिव्यू करेगी और उसके बाद ही सप्लाई पर फैसला लिया जाएगा। इससे गैस के बंटवारे में पारदर्शिता बनी रहेगी और इमरजेंसी हालातों में भी सिस्टम सही तरीके से काम करेगा।

