रायपुर/बलौदाबाजार, 01 मई 2026: छत्तीसगढ़ सरकार के ‘सुशासन’ के संकल्प को धरातल पर उतारने के लिए बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में एक अनूठी पहल शुरू की गई है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विजन के अनुरूप जिले में ‘सुशासन तिहार’ का आगाज हुआ है, जिसका उद्देश्य सरकारी तंत्र को दफ्तरों से निकालकर सीधे ग्रामीणों के दरवाजे तक पहुँचाना है। शुक्रवार को ग्राम रिसदा में आयोजित पहले शिविर ने यह साबित कर दिया कि यदि इच्छाशक्ति हो, तो वर्षों से अटकी समस्याओं का समाधान कुछ ही मिनटों में संभव है।
अभियान के शुभारंभ के अवसर पर प्रदेश के राजस्व मंत्री श्री टंक राम वर्मा विशेष रूप से उपस्थित रहे। उन्होंने स्पष्ट संदेश दिया कि सरकार की प्राथमिकता अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति के जीवन में खुशहाली लाना है। मंत्री ने अधिकारियों को दो-टूक निर्देश दिए कि शिविर का उद्देश्य केवल आवेदन जमा करना नहीं, बल्कि उनका गुणवत्तापूर्ण निराकरण करना है। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वे समाधान के बाद हितग्राहियों से फीडबैक भी लें, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि ग्रामीण वास्तव में संतुष्ट हैं।
इस शिविर की सबसे बड़ी उपलब्धि ‘ऑन द स्पॉट’ न्याय रहा। रिसदा के हाई स्कूल प्रांगण में लगे इस शिविर में कुल 573 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से लगभग 47 प्रतिशत मामलों का निराकरण मंत्री की मौजूदगी में तुरंत कर दिया गया। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि जिला प्रशासन अब फाइलों को उलझाने के बजाय सुलझाने की दिशा में काम कर रहा है। जिन आवेदनों में तकनीकी पेच फँसे थे, उनके लिए कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने एक सख्त समय-सीमा (Timeline) निर्धारित की है।
सुशासन तिहार केवल शिकायतों का केंद्र नहीं बना, बल्कि यह विभिन्न विभागों की कल्याणकारी योजनाओं का ‘वन-स्टॉप डेस्टिनेशन’ भी साबित हुआ। शिविर में स्वास्थ्य विभाग के स्टॉल पर आधुनिक चिकित्सा सुविधाएँ उपलब्ध कराई गईं, जहाँ डिजिटल एक्स-रे और तत्काल आयुष्मान कार्ड बनाने की सुविधा ने बुजुर्गों और गंभीर मरीजों को बड़ी राहत दी। ग्रामीणों को अब इन बुनियादी सुविधाओं के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर काटने की मजबूरी नहीं रही।
सुरक्षा और सामाजिक चेतना के क्षेत्र में भी शिविर ने अपनी छाप छोड़ी। पुलिस विभाग द्वारा सड़क सुरक्षा को बढ़ावा देने के लिए ग्रामीणों को हेलमेट वितरित किए गए और भारत माता वाहिनी को आवश्यक संसाधन भेंट किए गए। इसके अलावा, युवाओं को उनके कौशल विकास के लिए सम्मान पत्र सौंपे गए, जिससे स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्वरोजगार के प्रति उत्साह देखा गया। प्रशासन ने इसके जरिए यह संदेश दिया कि सुशासन में सुरक्षा और स्वावलंबन दोनों अनिवार्य हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक सहभागिता को प्रोत्साहित करने के लिए एक विशेष पहल की गई। टीबी मुक्त गांव घोषित होने वाले पंचायतों के सरपंचों को महात्मा गांधी की प्रतिमा भेंट कर सम्मानित किया गया। यह कदम न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाता है, बल्कि सामुदायिक नेतृत्व को भी मजबूती प्रदान करता है। सरपंचों ने इस सम्मान को अपने गांव के लिए गौरव का विषय बताया और भविष्य में और भी बेहतर कार्य करने का संकल्प लिया।
कलेक्टर कुलदीप शर्मा ने इस अभियान की भविष्य की रूपरेखा साझा करते हुए बताया कि यह सिलसिला रुकने वाला नहीं है। आगामी 10 जून तक जिले के 30 ग्रामीण केंद्रों और 19 नगरीय निकायों में ‘सुशासन तिहार’ के जरिए हर घर तक पहुँचने का लक्ष्य रखा गया है। प्रशासन की कोशिश है कि जिले का कोई भी नागरिक अपनी समस्याओं को लेकर उपेक्षित महसूस न करे और सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों को उनके घर पर ही मिले।
निष्कर्षतः, रिसदा से शुरू हुआ यह ‘सुशासन का रथ’ छत्तीसगढ़ के प्रशासनिक इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकता है। जन-प्रतिनिधियों और अधिकारियों के बीच बढ़ते समन्वय ने जनता के भीतर सरकार के प्रति विश्वास को और गहरा किया है। यदि इसी पारदर्शिता और गति से कार्य जारी रहा, तो वह दिन दूर नहीं जब ‘सुशासन’ केवल एक शब्द न रहकर छत्तीसगढ़ के हर नागरिक की जीवनशैली का हिस्सा होगा।

