जन विश्वास बिल: ‘इज ऑफ डूइंग बिजनेस’ और ‘इज ऑफ लिविंग’ की दिशा में क्रांतिकारी कदम
नई दिल्ली: भारत सरकार ने देश के कानूनी ढांचे में एक ऐतिहासिक बदलाव करते हुए ‘जन विश्वास (प्रावधानों में संशोधन) विधेयक’ को संसद से पारित कर दिया है। गजट नोटिफिकेशन जारी होने के साथ ही यह बिल कानून का रूप ले लेगा, जिससे देश के 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में बड़े बदलाव होंगे। इस कानून का प्राथमिक उद्देश्य छोटे-मोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर करना और व्यापारिक बाधाओं को दूर करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे आम जनता और व्यापार जगत के लिए एक बड़ी सफलता बताया है। उन्होंने कहा कि यह विधेयक नागरिकों के लिए ‘विश्वास-आधारित शासन’ को मजबूत करने की दिशा में एक मील का पत्थर है। पुराने और अप्रासंगिक कानूनों को खत्म करके, सरकार मुकदमों के बोझ को कम करने और मामलों के तेजी से निपटान की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना चाहती है।
वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने इस बिल को ‘राम राज्य’ की अवधारणा से जोड़ते हुए कहा कि यह लोगों के जीवन स्तर में सुधार लाएगा। इस बिल के माध्यम से लगभग एक हजार ऐसे अपराधों को अपराध की श्रेणी से बाहर (Decriminalize) कर दिया गया है, जो पहले नागरिकों के लिए मानसिक और कानूनी उत्पीड़न का कारण बनते थे। अब कई मामलों में जेल की सजा के स्थान पर केवल आर्थिक दंड या चेतावनी का प्रावधान होगा।
राजमार्गों से जुड़े नियमों में एक बड़ा बदलाव किया गया है। राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 के तहत अब तक सड़क जाम करने पर 5 साल की जेल का प्रावधान था, जिसे अब समाप्त कर दिया गया है। भविष्य में ऐसी स्थितियों में केवल नागरिक दंड या जुर्माना लगाया जाएगा, जिससे अनजाने में हुई गलतियों के लिए जेल जाने का डर खत्म होगा।
स्वास्थ्य और सौंदर्य प्रसाधन (Cosmetics) क्षेत्र में भी नियमों को तर्कसंगत बनाया गया है। ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट के तहत नियमों के उल्लंघन पर अब जेल की सजा नहीं होगी। सरकार ने माना है कि तकनीकी त्रुटियों या मामूली उल्लंघनों के लिए केवल जुर्माना ही पर्याप्त है, ताकि उद्योगों को अनावश्यक कानूनी पेचीदगियों से बचाया जा सके।
आम नागरिकों के लिए सबसे बड़ी राहत ड्राइविंग लाइसेंस (DL) के रिन्यूअल में मिली है। अब लाइसेंस की अवधि समाप्त होने के बाद भी उसे 30 दिनों तक वैध माना जाएगा। साथ ही, रिन्यूअल की तारीख की गणना अब आवेदन की तिथि से होगी, जिससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो किसी कारणवश समय पर रिन्यू नहीं करा पाते थे।
अक्सर मज़ाक या गलती में बजाए जाने वाले ‘झूठे फायर अलार्म’ को लेकर भी कानून नरम हुआ है। अब आग का झूठा अलार्म देना दंडात्मक अपराध नहीं माना जाएगा। इसे अपराध की श्रेणी से पूरी तरह बाहर कर दिया गया है, जो इस बात का संकेत है कि सरकार छोटी मानवीय भूलों के प्रति अपना रुख नरम कर रही है।
बिजली अधिनियम, 2003 में भी महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। पहले विभाग के निर्देशों का पालन न करने पर तीन महीने की जेल हो सकती थी, लेकिन अब केवल जुर्माने का प्रावधान शेष रहेगा। यह बदलाव उन उपभोक्ताओं और छोटे व्यवसायियों के लिए बड़ी राहत है जो अक्सर प्रशासनिक देरी या गलतफहमी के कारण जेल की धमकी का सामना करते थे।
ग्रामीण भारत और किसानों के लिए ‘कैटल ट्रेसपास एक्ट’ में संशोधन किया गया है। आवारा मवेशियों द्वारा फसल को नुकसान पहुँचाने पर अब जेल की सजा के बजाय नागरिक दंड लगेगा। पशुओं को खुला छोड़ने की स्थिति में भी अब केवल जुर्माने की व्यवस्था होगी, जिससे किसानों और पशुपालकों के बीच कानूनी विवादों का निपटारा आसान होगा।
पहली बार गलती करने वालों के लिए यह बिल ‘सुधार का मौका’ प्रदान करता है। उदाहरण के तौर पर, अप्रेंटिस अधिनियम के तहत होने वाली छोटी गलतियों पर अब सीधे दंड नहीं दिया जाएगा। पहली बार में केवल सलाह दी जाएगी, दूसरी बार में चेतावनी, और बार-बार उल्लंघन करने पर ही जुर्माना लगाया जाएगा।
इस विधेयक की एक विशेष बात जुर्माने की राशि का निर्धारण है। अब जुर्माना अपराध की गंभीरता के अनुपात में तय किया जाएगा। इसके अलावा, जुर्माने की राशि स्थिर नहीं रहेगी; इसमें हर तीन साल में कम से कम 10 प्रतिशत की वृद्धि का प्रावधान किया गया है, ताकि कानून का प्रभाव और गंभीरता बनी रहे।
कुल मिलाकर, जन विश्वास बिल भारत की कानूनी व्यवस्था को अधिक मानवीय और प्रगतिशील बनाने का प्रयास है। यह न केवल नौकरशाही के हस्तक्षेप को कम करेगा, बल्कि ‘मिनिमम गवर्नमेंट, मैक्सिमम गवर्नेंस’ के विजन को भी धरातल पर उतारेगा। इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की व्यापारिक साख बढ़ेगी और अदालतों में लंबित मुकदमों की संख्या में भारी कमी आने की उम्मीद है।

