जम्मू-कश्मीर में मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व वाली सरकार के पहले मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के भीतर भारी आंतरिक कलह और असंतोष खुलकर सामने आ गया है। इस हालिया राजनीतिक फेरबदल के बाद पार्टी के भीतर नाराजगी का माहौल इस कदर बढ़ गया है कि मंत्री पद से चूके कई विधायक और उनके समर्थक सीधे तौर पर बगावती तेवर अपनाते नजर आ रहे हैं।
श्रीनगर के लोक भवन में हुए सादे समारोह में उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के चार नए विधायकों—अली मोहम्मद सागर, शमीमा फिरदौस, मीर सैफुल्लाह और अल्ताफ अहमद वानी (कलू)—को मंत्री पद की शपथ दिलाई। इस विस्तार के साथ ही समीकरण बदले और जम्मू संभाग से ताल्लुक रखने वाले निर्दलीय विधायक सतीश शर्मा को बाहर का रास्ता देखना पड़ा, जिससे सियासी पारा और अधिक चढ़ गया।
इस शपथ ग्रहण समारोह से नेशनल कॉन्फ्रेंस के करीब 11 असंतुष्ट विधायकों की गैरमौजूदगी ने पार्टी के भीतर गहरी नाराजगी की पोल खोल दी। इन नाराज नेताओं में अब्दुल मजीद लारमी, मुबारक गुल, डॉ. बशीर अहमद वीरी, और नजीर अहमद गुरजी जैसे पार्टी के कई वरिष्ठ और वफादार चेहरे शामिल हैं। इनमें से कुछ विधायक तो सार्वजनिक तौर पर अपनी निराशा छिपा नहीं पाए और बेहद भावुक नजर आए।
स्थिति तब और अधिक गंभीर हो गई जब इन उपेक्षित और नाराज नेताओं के समर्थक सड़कों पर उतर आए। पार्टी नेतृत्व के खिलाफ गुस्सा जाहिर करते हुए कई समर्थकों और कार्यकर्ताओं ने अनोखे और उग्र तरीके से विरोध प्रदर्शन किया, जिसमें कुछ जगहों पर कफन पहनकर प्रदर्शन करने जैसी तस्वीरें भी सामने आईं। ईदगाह विधानसभा क्षेत्र से लगातार जीत दर्ज करने वाले वरिष्ठ नेता मुबारक गुल को मंत्रिमंडल में जगह न मिलने से उनके समर्थकों में भारी आक्रोश देखा गया।
विवाद को बढ़ता देख नेशनल कॉन्फ्रेंस के शीर्ष नेतृत्व ने तत्काल डैमेज कंट्रोल की कवायद शुरू कर दी है। इसी कड़ी में पार्टी ने नाराज चल रहे वरिष्ठ नेता मुबारक गुल को संगठन में महासचिव पद की अहम जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि असंतोष की आग को समय रहते शांत किया जा सके और पार्टी के भीतर टूट को रोका जा सके।
इस मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर क्षेत्रीय संतुलन बिगड़ने के गंभीर आरोप भी लग रहे हैं। आलोचकों और विपक्षी दलों, विशेषकर भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने उमर सरकार पर निशाना साधते हुए कहा है कि इस विस्तार में कश्मीर घाटी को अत्यधिक प्राथमिकता दी गई है और जम्मू संभाग की नुमाइंदगी को कमजोर किया गया है, जिससे क्षेत्रवाद की भावना को बढ़ावा मिल रहा है।
कुल मिलाकर, सरकार गठन के कुछ ही समय बाद उपजा यह आंतरिक संकट मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और पार्टी आलाकमान के लिए एक बड़ी राजनीतिक चुनौती बन गया है। यदि समय रहते इन नाराज विधायकों और उनके समर्थकों की नाराजगी दूर नहीं की गई, तो यह आने वाले समय में सरकार की स्थिरता और पार्टी की एकजुटता के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।

