बिलासपुर: छत्तीसगढ़ के न्यायधानी बिलासपुर से बैंकिंग सुरक्षा पर सवालिया निशान खड़ा करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। शहर के मंगला स्थित ICICI बैंक की शाखा में लगभग 1.38 करोड़ रुपये की भारी हेराफेरी का खुलासा हुआ है। इस पूरे घोटाले का मास्टरमाइंड कोई बाहरी अपराधी नहीं, बल्कि बैंक की ही डिप्टी ब्रांच मैनेजर और उनका पति है। इस खबर के सामने आने के बाद से बैंक के ग्राहकों में हड़कंप मचा हुआ है और पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।
सोने की जगह मिला ‘पीतल’: ऐसे हुआ खुलासा धोखाधड़ी का खुलासा तब हुआ जब बैंक प्रबंधन ने नियमित जांच के दौरान दस्तावेजों और लॉकर की पड़ताल की। जांच टीम उस वक्त हैरान रह गई जब गोल्ड लोन के लिए गिरवी रखे गए सोने के पाउच खोले गए। आरोपियों ने बड़ी चालाकी से असली सोने के आभूषण निकाल लिए थे और उनकी जगह नकली आभूषण भर दिए थे। पैकेट ऊपर से सीलबंद थे, लेकिन उनके भीतर बैंक की पूंजी नहीं बल्कि महज धातु के टुकड़े थे।
FD और निवेश के रिकॉर्ड भी गायब आंतरिक ऑडिट में यह भी पाया गया कि आरोपियों ने केवल सोने पर ही हाथ साफ नहीं किया, बल्कि ग्राहकों की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) के साथ भी छेड़छाड़ की। जांच के दौरान कई ग्राहकों के निवेश वाउचर और जरूरी दस्तावेज बैंक के रिकॉर्ड से गायब मिले। आरोपियों ने बैंक के सिस्टम का फायदा उठाकर डेटा के साथ इस तरह छेड़छाड़ की थी कि सामान्य तौर पर इसे पकड़ना मुश्किल था।
फर्जी हस्ताक्षर और अवैध ट्रांजेक्शन रिपोर्ट के मुताबिक, आरोपियों ने ग्राहकों के फर्जी हस्ताक्षर करने में महारत हासिल कर ली थी। पुलिस को मिली जानकारी के अनुसार, करीब 87.95 लाख रुपये के 14 अवैध ट्रांजेक्शन किए गए। इसमें ग्राहकों की जानकारी के बिना उनके खातों से पैसे ट्रांसफर किए गए। यह पूरी साजिश अगस्त 2024 से सितंबर 2025 के बीच रची गई, जिसे बैंक के भीतर बैठकर ही अंजाम दिया गया।
महिला ग्राहक की जमा पूंजी पर डाका इस घोटाले का एक और चौंकाने वाला पहलू ‘ओवरड्राफ्ट’ सुविधा का दुरुपयोग है। एक महिला ग्राहक की मेहनत की कमाई, जो लगभग 30 लाख रुपये की FD थी, उस पर उनकी अनुमति के बिना ओवरड्राफ्ट लिया गया। आरोपियों ने इस जमा पूंजी में से 28.29 लाख रुपये निकाल लिए। जब तक पीड़िता को इस बात की भनक लगती, तब तक आरोपी रकम डकार चुके थे।
बैंकिंग सेवा के नाम पर डिजिटल लूट जांच में यह बेहद गंभीर बात सामने आई है कि आरोपी डिप्टी मैनेजर ग्राहकों के घर जाकर ‘डोरस्टेप बैंकिंग’ का बहाना बनाती थी। सेवा देने के नाम पर वह ग्राहकों के मोबाइल ऐप का एक्सेस ले लेती थी। तकनीकी जानकारी न होने के कारण कई बुजुर्ग और भोले-भाले ग्राहक अपना फोन उन्हें सौंप देते थे, जिसका फायदा उठाकर वह पासवर्ड और ट्रांजेक्शन पिन बदलकर खाते खाली कर देती थी।
22 सितंबर से फरार हैं आरोपी दंपत्ति जैसे ही बैंक प्रबंधन को इस गड़बड़ी की भनक लगी और उन्होंने कड़ाई से जांच शुरू की, आरोपी डिप्टी ब्रांच मैनेजर और उसका पति भूमिगत हो गए। बताया जा रहा है कि दोनों 22 सितंबर 2025 से ही फरार हैं। बैंक मैनेजर अरूप पाल की लिखित शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने धोखाधड़ी और आपराधिक षड्यंत्र का मामला दर्ज कर लिया है।
पुलिस की कार्रवाई और तलाश जारी सिविल लाइन थाना प्रभारी एस.आर. साहू ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टीम गठित की गई है। पुलिस आरोपियों के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है और उनके बैंक खातों व कॉल रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है। पुलिस का दावा है कि जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा और इस सिंडिकेट में शामिल अन्य संभावित नामों का भी खुलासा होगा।
ग्राहकों में असुरक्षा का भाव इस घटना ने निजी बैंकों की आंतरिक सुरक्षा प्रणाली (Internal Audit) की पोल खोल दी है। मंगला शाखा के कई ग्राहक अब अपने खातों की स्थिति जांचने बैंक पहुँच रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह मामला एक सबक है कि किसी भी बैंक कर्मचारी को अपने मोबाइल ऐप या निजी पिन की जानकारी देना कितना घातक हो सकता है। फिलहाल, बिलासपुर पुलिस इस करोड़ों के गबन की गुत्थी सुलझाने में जुटी है।

