रायपुर, 12 अप्रैल 2026। राजधानी के हृदय स्थल में स्थित महंत घासीदास संग्रहालय की आर्ट गैलरी आज एक अनूठे कलात्मक संगम की साक्षी बनी। छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप (CGPAG) द्वारा आयोजित तीसरी दृश्य कला प्रदर्शनी ‘गौरा’ का समापन आज प्रेरणा और हर्षोल्लास के साथ हुआ। 10 अप्रैल से शुरू हुई इस तीन दिवसीय प्रदर्शनी ने न केवल रायपुर के कला प्रेमियों को मंत्रमुग्ध किया, बल्कि छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान को एक नई ऊंचाई प्रदान की।
प्रदर्शनी का औपचारिक उद्घाटन 10 अप्रैल को मुख्य अतिथि श्री गुरु खुशवंत, तकनीकी शिक्षा मंत्री, छत्तीसगढ़ शासन द्वारा किया गया। इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि के रूप में प्रख्यात लेखक डॉ. चित्तरंजन कर और नई दिल्ली के प्रसिद्ध क्यूरेटर व कला समीक्षक वेद प्रकाश भारद्वाज उपस्थित रहे। उद्घाटन समारोह के साथ ही यह गैलरी दर्शकों के लिए खोल दी गई, जहाँ देशभर के 100 से अधिक प्रतिष्ठित कलाकारों की कृतियों को एक ही छत के नीचे प्रदर्शित किया गया।
तकनीकी शिक्षा मंत्री श्री गुरु खुशवंत ने आयोजन की सराहना करते हुए कहा कि ‘गौरा’ प्रदर्शनी छत्तीसगढ़ की जीवंत और विविध कलात्मक भावना का प्रतीक है। उन्होंने इस बात पर गर्व व्यक्त किया कि राज्य के 100 प्रगतिशील कलाकार एक साथ आकर हमारे सांस्कृतिक परिदृश्य में अपनी रचनात्मकता का योगदान दे रहे हैं। उनके अनुसार, यह आयोजन क्षेत्र के कलाकारों के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
प्रदर्शनी के क्यूरेटर और CGPAG के प्रमुख डॉ. ध्रुव तिवारी ने कला की शक्ति पर प्रकाश डालते हुए इसे अभिव्यक्ति और परिवर्तन का माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि ‘गौरा’ का मुख्य उद्देश्य छत्तीसगढ़ की छिपी हुई कलात्मक प्रतिभा को दुनिया के सामने लाना है। डॉ. तिवारी के अनुसार, यह केवल कैनवास पर उकेरे गए रंग नहीं हैं, बल्कि यह कलाकार और दर्शक के बीच एक गहरा संवाद है, जो व्यक्तिगत स्तर पर जुड़ाव पैदा करता है।
आयोजन की सफलता में CGPAG की संगठनात्मक टीम ने सक्रिय भूमिका निभाई। इसमें क्यूरेटर डॉ. ध्रुव तिवारी के साथ को-ऑर्डिनेटर जितेन साहू, एसोसिएट को-ऑर्डिनेटर शांति तिर्की और कोषाध्यक्ष अनिल खोबरागड़े के परिश्रम ने इस बड़े आयोजन को सुव्यवस्थित रूप प्रदान किया। प्रदर्शनी में प्रदर्शित हर कलाकृति कलाकारों के लचीलेपन, नवाचार और उनके अटूट जुनून का जीवंत प्रमाण बनकर उभरी।
प्रदर्शनी के दौरान दर्शकों ने महसूस किया कि कलाकृतियां केवल सौंदर्य का विषय नहीं थीं, बल्कि वे पहचान, विरासत, पर्यावरण और मानवीय संवेदनाओं जैसे गंभीर विषयों को भी संबोधित कर रही थीं। प्रत्येक कृति को देखने पर ऐसा प्रतीत होता था मानो वह कलाकार की आत्मा की एक खिड़की हो, जो शब्दों की सीमाओं को लांघकर सीधे दर्शकों के हृदय तक अपनी भावनाएं पहुंचा रही हो।

डॉ. ध्रुव तिवारी ने आगंतुकों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि कला में विचार को उकसाने और समझ विकसित करने की अद्भुत शक्ति होती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि ‘गौरा’ ने प्रत्येक दर्शक के भीतर जिज्ञासा की एक चिंगारी प्रज्वलित की होगी, जो उन्हें हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से और गहराई से जोड़ेगी। यह प्रदर्शनी समाज में कला के प्रति प्रशंसा का भाव जगाने में सफल रही है।
समापन के अवसर पर डॉ. तिवारी ने उन सभी 100 कलाकारों का आभार व्यक्त किया जिन्होंने अपनी अमूल्य कृतियों का योगदान दिया। साथ ही, उन्होंने प्रायोजकों और समर्थकों को भी धन्यवाद दिया जिन्होंने इस परिकल्पना को वास्तविकता में बदलने में मदद की। उन्होंने कहा कि कलाकारों की लगन ही इस उत्सव की असली प्रेरक शक्ति रही है।
उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप (CGPAG) राज्य में समकालीन कला को बढ़ावा देने वाला एक सक्रिय मंच बन चुका है। इसकी यात्रा वर्ष 2025 में ‘सोहाई’ प्रदर्शनी से शुरू हुई थी और अब ‘गौरा’ के सफल आयोजन ने यह स्पष्ट कर दिया है कि छत्तीसगढ़ की कला यात्रा निरंतर नई ऊंचाइयों को छूने के लिए तैयार है।

