जापान के हिरोशिमा और नागासाकी पर हुए परमाणु हमलों को अब लगभग 80 साल बीत चुके हैं। 1945 में हुए उस भीषण विनाश के बाद आज ये दोनों शहर पूरी तरह बदल चुके हैं। जहाँ कभी लाशों के ढेर और मलबे के सिवा कुछ नहीं था, आज वहाँ आधुनिक गगनचुंबी इमारतें, बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर और चहल-पहल वाले बाजार हैं। जापान ने अपनी तकनीक और इच्छाशक्ति के दम पर इन शहरों को राख से फिर से खड़ा कर दिया है।
आज के हिरोशिमा और नागासाकी को देखकर यह अंदाजा लगाना मुश्किल है कि यहाँ कभी परमाणु तबाही हुई थी। हिरोशिमा अब एक ‘शांति का शहर’ (City of Peace) माना जाता है। यहाँ का ‘पीस मेमोरियल पार्क’ दुनिया भर के पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है। शहर में रेडिएशन का स्तर अब सामान्य है और लोग बिना किसी डर के यहाँ रह रहे हैं, खेती कर रहे हैं और व्यापार कर रहे हैं।
हालांकि, बुनियादी ढांचा तो ठीक हो गया, लेकिन मानवीय दर्द आज भी कहीं न कहीं जिंदा है। परमाणु बम की मार झेलने वाले लोगों को जापान में ‘हिबाकुशा’ कहा जाता है। अब इनकी संख्या कम हो रही है क्योंकि बचे हुए लोग काफी बुजुर्ग (औसत उम्र 85 वर्ष से अधिक) हो चुके हैं। ये लोग आज भी उस खौफनाक मंजर की यादों और उसके मनोवैज्ञानिक असर के साथ जी रहे हैं।
स्वास्थ्य की दृष्टि से देखें तो ‘हिबाकुशा’ और उनके वंशजों में कैंसर, ल्यूकेमिया और अन्य रेडिएशन जनित बीमारियों का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में अधिक देखा गया है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि अब नई पीढ़ियों में इसके जेनेटिक प्रभाव के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं, फिर भी एक डर और सामाजिक हिचकिचाहट लंबे समय तक बनी रही। कई दशकों तक इन सर्वाइवर्स को शादी और नौकरी में भेदभाव का सामना करना पड़ा क्योंकि लोगों को लगता था कि यह बीमारी पीढ़ियों तक चलेगी।
जापान की सरकार अब इन सर्वाइवर्स को विशेष स्वास्थ्य सुविधाएं और वित्तीय मदद प्रदान करती है। इन शहरों में विशेष अस्पताल हैं जो केवल परमाणु विकिरण के प्रभावों का इलाज और शोध करते हैं। वर्तमान में चुनौती यह है कि ‘हिबाकुशा’ के बाद उनकी कहानियों और परमाणु हथियारों के खिलाफ उनके संदेश को आने वाली पीढ़ियों तक कैसे पहुँचाया जाए।
निष्कर्षतः, जापान ने भौतिक रूप से खुद को पूरी तरह उबार लिया है और आज वह दुनिया की प्रमुख आर्थिक शक्तियों में से एक है। लेकिन हिरोशिमा और नागासाकी की आत्मा पर लगे घाव पूरी तरह नहीं भरे हैं। ये शहर आज पूरी दुनिया को यह चेतावनी देते रहते हैं कि परमाणु हथियार मानवता के लिए कितने विनाशकारी हो सकते हैं।

