भारतीय राजनीति की दिग्गज नेत्री और पूर्व केंद्रीय मंत्री मोहसिना किदवई का बुधवार सुबह 94 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से अस्वस्थ चल रही थीं और नोएडा के एक अस्पताल में उन्होंने अंतिम सांस ली। किदवई का जन्म 1 जनवरी, 1932 को उत्तर प्रदेश के बाराबंकी में हुआ था। उनके निधन की खबर से राजनीतिक गलियारों में शोक की लहर दौड़ गई है, क्योंकि उन्हें कांग्रेस पार्टी के सबसे वफादार और शालीन चेहरों में से एक माना जाता था।
मोहसिना किदवई का संसदीय सफर बेहद शानदार रहा। वे मेरठ से तीन बार (1978 उपचुनाव, 1980 और 1984) लोकसभा सांसद चुनी गईं। इसके अलावा, उन्होंने छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करते हुए दो बार राज्यसभा सदस्य के रूप में भी कार्य किया। इंदिरा गांधी और राजीव गांधी की सरकारों में उन्होंने कैबिनेट मंत्री के रूप में स्वास्थ्य, नागरिक उड्डयन, पर्यटन और शहरी विकास जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण मंत्रालयों का कार्यभार संभाला और अपनी प्रशासनिक दक्षता का लोहा मनवाया।
उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उन्हें जनसेवा की प्रतिमूर्ति बताया। राहुल गांधी ने कहा कि उनका पूरा जीवन सादगी और गरिमापूर्ण राजनीति का उदाहरण रहा है, जिसने देश की महिलाओं की कई पीढ़ियों को प्रेरित किया। पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेताओं ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि किदवई ने संकट के समय में भी हमेशा कांग्रेस का साथ निभाया और संगठन को मजबूती प्रदान की।
अंतिम विदाई के कार्यक्रम के अनुसार, उनकी अंतिम यात्रा बुधवार दोपहर 3 बजे नोएडा के सेक्टर 40 स्थित उनके आवास से शुरू होगी। इसके पश्चात, शाम 5 बजे दिल्ली के प्रसिद्ध निजामुद्दीन कब्रिस्तान में उन्हें सुपुर्दे-खाक किया जाएगा। उनके समर्थकों और शुभचिंतकों का नोएडा स्थित निवास पर जुटना शुरू हो गया है, जहाँ लोग अपनी इस प्रिय जननेता को अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं।

