झारखंड की राजधानी रांची स्थित बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में बंद प्रतिबंधित संगठन भाकपा (माओवादी) के शीर्ष नेता प्रशांत बोस उर्फ ‘किशन दा’ की शुक्रवार तड़के करीब 4 बजे मौत हो गई। वह 75 वर्ष से अधिक उम्र के थे और पिछले काफी समय से स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे थे। उनकी मौत के बाद जेल प्रशासन ने सुरक्षा के कड़े इंतजामों के बीच उनके शव को पोस्टमार्टम के लिए रांची के रिम्स (RIMS) अस्पताल भेज दिया है।
प्रशांत बोस माओवादी संगठन के सबसे प्रभावशाली चेहरों में से एक थे और उन्हें संगठन का मुख्य ‘थिंक टैंक’ माना जाता था। वह भाकपा (माओवादी) के पोलित ब्यूरो सदस्य थे और महासचिव नंबला केशव राव के बाद संगठन में दूसरे सबसे ऊंचे पद पर काबिज थे। मूल रूप से पश्चिम बंगाल के रहने वाले बोस पर झारखंड सहित बिहार, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में 200 से अधिक नक्सली वारदातों को अंजाम देने का आरोप था। उनकी गिरफ्तारी पर 1 करोड़ रुपये का इनाम घोषित था।
वर्ष 2004 में माओवादी कम्युनिस्ट सेंटर ऑफ इंडिया (MCCI) और पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) के विलय में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही थी, जिससे आधुनिक भाकपा (माओवादी) संगठन का उदय हुआ। उन्हें 12 नवंबर 2021 को सरायकेला-खरसावां जिले से उनकी पत्नी शीला मरांडी के साथ गिरफ्तार किया गया था। तब से वह जेल में ही थे और उनकी गिरफ्तारी को सुरक्षा एजेंसियों के लिए एक बड़ी उपलब्धि और नक्सली आंदोलन के लिए एक बड़ा झटका माना गया था।
किशन दा की मौत के बाद झारखंड समेत आसपास के सभी नक्सल प्रभावित राज्यों में सुरक्षा एजेंसियों ने हाई अलर्ट जारी कर दिया है। चूंकि वह एक वरिष्ठ रणनीतिकार और वैचारिक नेता थे, इसलिए सुरक्षा बलों को अंदेशा है कि नक्सली संगठन उनकी मृत्यु के विरोध में किसी हिंसक घटना या बंद का आह्वान कर सकते हैं। फिलहाल प्रशासन पोस्टमार्टम की रिपोर्ट और आगे की कानूनी प्रक्रियाओं को पूरा करने में जुटा है।

