हाल ही में चिकित्सा विज्ञान से जुड़े एक महत्वपूर्ण अध्ययन में यह बात सामने आई है कि हाई ब्लड प्रेशर (उच्च रक्तचाप) के मरीजों के लिए अपनी दवाइयां रोज समय पर लेना कितना जीवनरक्षक साबित हो सकता है। यूरोपीय सोसाइटी ऑफ कार्डियोलॉजी कांग्रेस में प्रस्तुत किए गए इस शोध ने दिल की सेहत और दवा की नियमितता के बीच के गहरे संबंध को उजागर किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, जो लोग डॉक्टर द्वारा बताई गई बीपी की गोलियों का सेवन बिना किसी नागा के करते हैं, वे कई गंभीर स्वास्थ्य संकटों से सुरक्षित रह सकते हैं।
इस अध्ययन का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि नियमित रूप से दवा लेने वाले मरीजों में हार्ट अटैक, स्ट्रोक, इस्केमिक हृदय रोग और हार्ट फेलियर जैसी घातक हृदय संबंधी घटनाओं का खतरा 11% तक कम हो जाता है। शोधकर्ताओं ने पाया कि जिन रोगियों ने कम से कम 80% या उससे अधिक बार समय पर अपनी खुराक ली, उनके दिल पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव काफी हद तक नियंत्रित रहा, जिससे उन्हें दीर्घकालिक सुरक्षा मिली।
इसके विपरीत, जो लोग अपनी दवा खाने में लापरवाही बरतते हैं या बीच-बीच में खुराक छोड़ देते हैं, उन्हें दवाओं का वेंटिलेशन या कार्डियोप्रोटेक्टिव फायदा लगभग नहीं मिल पाता है। अनियमित रूप से दवा लेने के कारण शरीर में रक्तचाप का स्तर लगातार ऊपर-नीचे होता रहता है, जो धमनियों और हृदय की मांसपेशियों के लिए बेहद नुकसानदायक साबित होता है।
अध्ययन में यह भी चिंताजनक तथ्य सामने आया है कि जैसे-जैसे समय बीतता है, मरीजों की दवा के प्रति गंभीरता कम होने लगती है। इलाज के पहले साल में लगभग 88% मरीज पूरी नियमितता के साथ अपनी दवाइयां खा रहे थे, लेकिन पांचवें साल तक आते-आते यह आंकड़ा घटकर 79% पर आ गया। समय के साथ इस तरह की ढिलाई बरतना मरीजों की सेहत के लिए एक बड़ा जोखिम बन जाता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि हाई ब्लड प्रेशर को ‘साइलेंट किलर’ इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसके शुरुआती लक्षण आमतौर पर स्पष्ट रूप से दिखाई नहीं देते हैं। जब लोग शारीरिक रूप से सामान्य महसूस करते हैं, तो वे अक्सर यह सोचकर दवा लेना बंद कर देते हैं कि अब वे पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं, जो कि एक बहुत बड़ी और खतरनाक भूल है।
अधिकांश आधुनिक बीपी की दवाइयों का असर शरीर में केवल 24 घंटे तक ही रहता है। यदि कोई व्यक्ति एक दिन भी दवा छोड़ देता है, तो रक्तचाप अचानक बढ़ सकता है, जिससे अचानक दिल का दौरा पड़ने (Heart Attack) या ब्रेन स्ट्रोक होने की आशंका अत्यधिक बढ़ जाती है। लगातार और समय पर दवा लेते रहने से नसों पर अचानक पड़ने वाला दबाव थमता है।
अंततः यह शोध यही संदेश देता है कि उच्च रक्तचाप एक दीर्घकालिक स्थिति है, जिसके प्रबंधन के लिए अनुशासन सबसे बड़ा हथियार है। इसलिए, यदि आपको या आपके किसी करीबी को हाई बीपी की समस्या है, तो डॉक्टर की सलाह के बिना कभी भी खुद से दवा बंद न करें और अपनी जीवनशैली में सुधार के साथ-साथ हर रोज तय समय पर अपनी दवा का सेवन अवश्य करें।

