कार्डियक अरेस्ट (Cardiac Arrest) जैसी जानलेवा आपात स्थितियों में हर एक सेकंड कीमती होता है और सही समय पर मिलने वाला सीपीआर (CPR) किसी की जान बचा सकता है। इस दिशा में एक बेहद सराहनीय कदम उठाते हुए भारतीय मूल के छात्रों ने चिकित्सा तकनीक के क्षेत्र में एक नया मील का पत्थर स्थापित किया है। वाशिंगटन विश्वविद्यालय के इन प्रतिभाशाली छात्रों की टीम ने ‘सीपीराइट’ (CPRight) नाम का एक अनूठा और पोर्टेबल स्मार्ट पैच तैयार किया है।
इस आविष्कार का मुख्य उद्देश्य आपातकालीन चिकित्सा सहायता के पहुंचने से पहले आम जनता के लिए सीपीआर देना बेहद आसान और सटीक बनाना है। अक्सर यह देखा जाता है कि जब किसी व्यक्ति को कार्डियक अरेस्ट होता है, तो आसपास मौजूद लोग घबरा जाते हैं या उन्हें इस बात का अंदाजा नहीं होता कि छाती पर कितनी जोर से और किस गति से दबाव देना चाहिए। इसी समस्या का समाधान यह स्मार्ट पैच प्रदान करता है।
‘सीपीराइट’ की बनावट बेहद सरल और कॉम्पैक्ट है, जो वॉलेट के आकार का होता है। किसी भी आपात स्थिति में जब मरीज को इसकी जरूरत पड़ती है, तो इस पैच को सीधे मरीज की छाती की हड्डी यानी स्टर्नम (Sternum) के ऊपर चिपका दिया जाता है। इसका आकार इतना छोटा और सुविधाजनक है कि इसे आसानी से पॉकेट या पर्स में रखा जा सकता है, जिससे यह हर समय और हर जगह उपलब्ध हो सके।
इस स्मार्ट पैच की सबसे बड़ी तकनीकी विशेषता यह है कि यह पूरी तरह से स्वतंत्र रूप से काम करता है। इसे चलाने के लिए किसी स्मार्टफोन, ब्लूटूथ कनेक्शन, एक्सटर्नल मॉनिटर या अन्य जटिल डिजिटल उपकरणों की बिल्कुल भी आवश्यकता नहीं होती है। बचावकर्मियों को तकनीक की कोई विशेष जानकारी न होने पर भी वे इसका आसानी से उपयोग कर सकते हैं।
पैच के अंदर एक स्मार्ट सेंसर और एलईडी लाइट (LED Indicators) प्रणाली फिट की गई है। जब कोई व्यक्ति मरीज की छाती पर कंप्रेशन देना शुरू करता है, तो पैच पर जलने वाली लाइटें तुरंत फीडबैक देती हैं। यदि दबाव की गति और गहराई बिल्कुल सही होती है, तो हरी लाइट जलती है, जो यह दर्शाती है कि सीपीआर सही तरीके से हो रहा है।
चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, कार्डियक अरेस्ट के दौरान छाती पर पर्याप्त गहराई और उचित गति से दबाव न पड़ने पर मरीज की जान बचाने की संभावना काफी कम हो जाती है। यह स्मार्ट पैच उपयोगकर्ता को तुरंत दृश्य संकेत देकर मार्गदर्शन करता है, जिससे गैर-प्रशिक्षित लोग भी चिकित्सकीय रूप से सटीक सीपीआर देने में सक्षम हो जाते हैं।
छात्रों के इस जीवन-रक्षक और क्रांतिकारी आविष्कार को वैश्विक स्तर पर भारी सराहना मिली है। इस उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें प्रतिष्ठित ‘कॉलेजिएट इनवेंटर्स कॉम्पिटिशन 2026’ में सम्मानित किया गया है और पुरस्कार से नवाजा गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में सार्वजनिक स्थानों पर हजारों अनमोल जिंदगियां बचाने में मददगार साबित होगी।

