दिमाग की सेहत के लिए बढ़ता वायु प्रदूषण (AQI) अब एक गंभीर खतरा बनता जा रहा है। आम तौर पर लोग यह मानते हैं कि प्रदूषित हवा का असर केवल फेफड़ों और सांस की नली तक ही सीमित रहता है, लेकिन हालिया मेडिकल रिसर्च और विशेषज्ञ चेतावनियां बताती हैं कि यह जहर अब सीधे हमारी दिमाग की नसों को ब्लॉक कर रहा है।
पुष्पावती सिंघानिया हॉस्पिटल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट (PSRI) के न्यूरोसर्जन डॉ. अमिताभ गुप्ता और इंद्रप्रस्थ अपोलो अस्पताल के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. विनीत सूरी के अनुसार, प्रदूषण के मौसम में अस्पतालों की ओपीडी और इमरजेंसी में स्ट्रोक के मामलों में तेजी से इजाफा देखा जा रहा है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब 35 से 45 वर्ष के युवा भी इसकी चपेट में आ रहे हैं, जबकि पहले यह बीमारी मुख्य रूप से बुजुर्गों में देखी जाती थी।
डिस्कवर पब्लिक हेल्थ में प्रकाशित दिल्ली और शिमला के एक अध्ययन में 2021 से 2025 के बीच 41,000 से अधिक मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। इसके मुताबिक, दिल्ली में AQI में हर 10 अंक की वृद्धि होने पर एक दिन के भीतर हृदय और मस्तिष्क संबंधी घटनाओं में बड़ा जोखिम देखा गया है। हवा में मौजूद PM2.5 के अतिसूक्ष्म कण फेफड़ों से होते हुए सीधे रक्तप्रवाह में मिल जाते हैं और प्लेटलेट्स को अधिक चिपचिपा बना देते हैं, जिससे नसों में खून के थक्के (Blood Clots) जमने का खतरा बढ़ जाता है।
प्रदूषण के अलावा आधुनिक जीवनशैली के अन्य कारक जैसे लगातार तनाव और घंटों कुर्सी पर बैठकर काम करना (शारीरिक गतिविधि की कमी) इस स्थिति को और गंभीर बना रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पीएम 2.5 के महीन कण रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुँचाते हैं, जिससे रक्तचाप (Blood Pressure) बढ़ता है और मस्तिष्क की वाहिकाओं में रुकावट आने या उनके फटने (Stroke) की आशंका कई गुना बढ़ जाती है।
स्ट्रोक के शुरुआती लक्षणों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। इनमें अचानक संतुलन बिगड़ना, धुंधला दिखाई देना, चेहरे का एक तरफ लटकना, हाथ या पैर में सुन्नपन या कमजोरी महसूस होना और बोलने में परेशानी होना शामिल हैं। डॉक्टरों के अनुसार, लक्षण दिखने के बाद शुरुआती साढ़े चार घंटे (Golden Hour) उपचार के लिए बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, इसलिए ऐसी स्थिति में तुरंत न्यूरोलॉजिस्ट से संपर्क करना चाहिए।
इस साइलेंट किलर से बचने के लिए विशेषज्ञ कुछ जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। जब AQI का स्तर अधिक हो, तो सुबह की सैर पर जाने से बचें और बाहर निकलते समय N95 मास्क का उपयोग करें। इसके अलावा, लंबे समय तक एक जगह बैठने से बचें और हर 30 से 40 मिनट पर उठकर दो-तीन मिनट टहलें।
पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं, रोजाना 7 से 8 घंटे की पूरी नींद लें और धूमपान से दूरी बनाए रखें। उच्च रक्तचाप, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल जैसी समस्याओं से पीड़ित लोग अपने स्वास्थ्य की नियमित जांच कराते रहें, क्योंकि ये कारक प्रदूषण के साथ मिलकर स्ट्रोक के जोखिम को और ज्यादा खतरनाक बना देते हैं।

