रूस और यूक्रेन के बीच पिछले चार वर्षों से अधिक समय से जारी भीषण संघर्ष एक बार फिर बेहद खतरनाक और गंभीर मोड़ पर पहुंच गया है। दोनों देशों के बीच कूटनीतिक स्तर पर बातचीत और शांति प्रयासों की चर्चाओं के बीच मैदानी जंग और अधिक आक्रामक हो गई है।
ताजा घटनाक्रम के तहत, रूसी सेना ने शनिवार को यूक्रेन के विभिन्न हिस्सों को निशाना बनाते हुए बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। इन हमलों में लगभग 500 ड्रोन और कई मिसाइलों का इस्तेमाल किया गया, जिससे पूरे देश में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है।
यूजीनिया और अन्य यूक्रेनी अधिकारियों से मिली जानकारी के मुताबिक, इन हालिया हमलों में कम से कम 9 नागरिकों की मौत हो गई है, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। डोनेट्स्क क्षेत्र के क्रामाटोर्स्क शहर में मात्र 90 मिनट के भीतर हुए तीन अलग-अलग हमलों में तीन लोगों की जान चली गई।
रूसी हमलों की चपेट में केवल सैन्य ठिकाने ही नहीं, बल्कि रिहायशी इमारतें, पेट्रोल पंप और आम जनता से जुड़े बुनियादी ढांचे भी आए हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर ज़ेलेंस्की ने आरोप लगाया है कि रूस जानबूझकर देश की अर्थव्यवस्था और जरूरी ढांचे को तबाह करने की कोशिश कर रहा है।
राष्ट्रपति ज़ेलेंस्की ने टेलीग्राम पर जानकारी दी कि मॉस्को उन तमाम जगहों और आपूर्ति श्रृंखलाओं को नष्ट करना चाहता है, जो यूक्रेन को इस विकट युद्ध की स्थिति से निपटने में मदद कर रही हैं। लगातार हो रही बमबारी के कारण यूक्रेन के कई इलाकों में बिजली और पानी की आपूर्ति पर भी गहरा असर पड़ा है।
इस बीच, यूक्रेनी सेना ने भी रूस को करारा जवाब देना जारी रखा है और रूसी क्षेत्र में सामरिक ठिकानों पर पलटवार किया है। यूक्रेन ने रूस के समारा क्षेत्र के तोग्लियाटी में स्थित सिंथेटिक रबर बनाने वाली एक प्रमुख औद्योगिक इकाई को अपने ड्रोन हमले का निशाना बनाया, जिसके बाद वहां भीषण आग लग गई।
अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इस युद्ध को रोकने के लिए अमेरिका और यूरोपीय देशों द्वारा लगातार कूटनीतिक प्रयास किए जा रहे हैं। अमेरिकी दूतों और पश्चिमी देशों के प्रतिनिधियों की कीव यात्रा के बाद भी जमीन पर हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है, और दोनों पक्ष एक-दूसरे पर भारी पड़ना चाहते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जैसे-जैसे सर्दियां नजदीक आ रही हैं, ऊर्जा संयंत्रों और बुनियादी ढांचे पर रूसी हमले और तेज हो सकते हैं। इससे यूक्रेन के सामने मानवीय और आर्थिक संकट गहराने का भारी खतरा पैदा हो गया है, जिससे यह संघर्ष फिलहाल थमता नजर नहीं आ रहा है।

