छत्तीसगढ़ के कांकेर और मोहला-मानपुर क्षेत्र में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को एक और ऐतिहासिक सफलता हाथ लगी है। क्षेत्र में सक्रिय आरकेबी (RKB) डिवीजन के अंतिम पांच नक्सलियों ने हथियार डाल मुख्यधारा में शामिल होने का फैसला किया है। ये सभी पांचों नक्सली एसीएम (Area Committee Member) रैंक के कैडर हैं, जिनमें मंगेश, गणेशा, राजे, हिडमे और मंगती शामिल हैं। आत्मसमर्पण की औपचारिक प्रक्रिया के लिए ये सभी नक्सली अपने आधुनिक हथियारों के साथ कांकेर जिला मुख्यालय पहुँच रहे हैं, जहाँ वे एसपी निखिल राखेचा के समक्ष आत्मसमर्पण करेंगे।
इस आत्मसमर्पण को रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसके साथ ही आरकेबी डिवीजन की अंतिम सक्रिय कमेटी भी अब पूरी तरह समाप्त हो गई है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, इस इलाके में सक्रिय रहे अधिकांश बड़े नक्सली नेता या तो पिछले कुछ समय में मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं या सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर पहले ही सरेंडर कर चुके हैं। इन पांच नक्सलियों द्वारा अपने साथ लाए जा रहे एसएलआर (SLR) और दो .303 रायफल सुरक्षा बलों की उस सफलता पर मुहर लगाते हैं, जिसने नक्सलियों के सूचना तंत्र और सैन्य शक्ति को कमजोर कर दिया है।
सुरक्षा बलों के लिए यह खबर इसलिए भी राहत भरी है क्योंकि नक्सल उन्मूलन के लिए तय की गई 31 मार्च 2026 की डेडलाइन में अब महज पांच दिन शेष बचे हैं। समयसीमा समाप्त होने से पहले सक्रिय डिवीजन के अंतिम सदस्यों का मुख्यधारा में लौटना पुलिस की मनोवैज्ञानिक जीत को दर्शाता है। इससे न केवल स्थानीय ग्रामीणों में सुरक्षा का भाव बढ़ेगा, बल्कि उन युवाओं को भी संदेश जाएगा जो अब भी भटक कर जंगल की ओर चले जाते हैं। बस्तर संभाग में पिछले कुछ महीनों से चल रहे आक्रामक अभियान का यह एक सकारात्मक परिणाम माना जा रहा है।
हालाँकि, इस बड़ी सफलता के बावजूद कांकेर पुलिस के लिए चुनौती अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। वर्तमान में पुलिस के लिए सबसे बड़ी चुनौती कांकेर के घने जंगलों में छिपे शेष 17 नक्सली हैं। इन बचे हुए नक्सलियों में सबसे प्रमुख नाम डीवीसीएम (DVCM) चंदर और एसीएम रूपी का है, जो लंबे समय से सुरक्षा बलों की रडार पर हैं। हालांकि पिछले काफी समय से चंदर और रूपी के सरेंडर करने की अफवाहें बाजार में गर्म रही हैं, लेकिन अब तक उन्होंने आधिकारिक तौर पर हथियार नहीं डाले हैं।
कांकेर पुलिस अब अपनी पूरी ताकत इन अंतिम 17 नक्सलियों को घेरने या उन्हें सरेंडर के लिए प्रेरित करने में लगा रही है। पुलिस अधिकारियों का मानना है कि यदि ये प्रमुख नाम भी आत्मसमर्पण कर देते हैं, तो जिले को जल्द ही पूरी तरह नक्सल मुक्त घोषित करने की दिशा में एक बड़ा कदम बढ़ाया जा सकेगा। फिलहाल, सुरक्षा बल अलर्ट पर हैं और डेडलाइन से पहले नक्सलियों के बचे-कुचे नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए सघन तलाशी अभियान जारी है।

