विदेशी अंशदान (विनियमन) अधिनियम यानी FCRA संशोधन विधेयक, 2026 की गहन जांच के लिए गठित 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की पहली बैठक हाल ही में आयोजित की गई। इस महत्वपूर्ण बैठक में केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने समिति के समक्ष पेश होकर इस नए संशोधन विधेयक की आवश्यकता और इसके पीछे के मुख्य उद्देश्यों का पूरा लेखा-जोखा रखा।
गृह मंत्रालय ने JPC को आंकड़े देते हुए बताया कि पिछले एक दशक में देश में एफसीआरए के तहत पंजीकृत सक्रिय गैर-सरकारी संगठनों (NGOs) की संख्या लगभग आधी रह गई है। साल 2015 में जहां 29,022 एनजीओ पंजीकृत थे, वहीं अब घटकर इनकी संख्या 14,466 पर आ गई है। इसके विपरीत, इस अवधि में देश में आने वाले विदेशी फंड में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
मंत्रालय द्वारा साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2015-16 में जहां कुल विदेशी अंशदान 17,832 करोड़ रुपये था, वह बढ़कर वर्ष 2024-25 में 22,974 करोड़ रुपये तक पहुंच गया। इसके अलावा, वर्ष 2024-25 के दौरान एनजीओ के पास मौजूद कुल 35,968 करोड़ रुपये के अप्रयुक्त विदेशी योगदान में से 21,140 करोड़ रुपये अकेले फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में रखे गए थे।
गृह मंत्रालय ने JPC की बैठक में जोर देकर कहा कि यह संशोधन मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा, आंतरिक स्थिरता और विदेशी फंड के दुरुपयोग को रोकने से जुड़ा हुआ है। सरकार का मानना है कि देश की सुरक्षा व्यवस्था और कानून-व्यवस्था के हितों की रक्षा के लिए भारी मात्रा में आ रहे विदेशी धन पर कड़ी और प्रभावी निगरानी रखना बेहद जरूरी हो गया है।
इस विधेयक के तहत एक ‘नामित प्राधिकरण’ (Designated Authority) के गठन का भी प्रस्ताव है, जो उन संगठनों की संपत्तियों (जैसे स्कूल, अस्पताल आदि) का प्रबंधन और निपटान कर सके जिनका एफसीआरए लाइसेंस रद्द कर दिया गया है या जिनका नवीनीकरण नहीं हुआ है। सरकार का पक्ष है कि यह कानून उन तत्वों पर लगाम कसेगा जो विदेशी धन का उपयोग गलत गतिविधियों या निजी लाभ के लिए करते हैं।
दूसरी ओर, इस विधेयक को लेकर विपक्षी दलों, कांग्रेस, टीएमसी और कुछ अल्पसंख्यक एवं ईसाई संगठनों की ओर से कड़ा विरोध देखने को मिला है। उनका आरोप है कि इन संशोधनों से परमार्थ संगठनों और विशेषकर अल्पसंख्यकों द्वारा संचालित शैक्षणिक व समाज कल्याण संस्थानों की स्वायत्तता प्रभावित हो सकती है। तमिलनाडु और मिजोरम जैसे राज्यों में भी इसके विरोध में प्रस्ताव और रैलियां देखने को मिली हैं।
विपक्ष और विभिन्न हितधारकों की इन आपत्तियों व चिंताओं को देखते हुए सरकार ने इस विधेयक को व्यापक जांच के लिए JPC के पास भेज दिया है। भाजपा सांसद संजय जायसवाल की अध्यक्षता वाली यह संयुक्त संसदीय समिति विधेयक की सभी धाराओं और प्रभावों की बारीकी से जांच कर रही है, और इसे आगामी शीतकालीन सत्र के पहले सप्ताह के अंतिम दिन तक अपनी रिपोर्ट संसद को सौंपने का लक्ष्य दिया गया है।

