राजधानी रायपुर के तेलीबांधा मरीन ड्राइव पर मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का अचानक पहुंचना वहां मौजूद लोगों के लिए एक सुखद और आश्चर्यजनक पल बन गया। रोज की तरह सड़क किनारे अपना छोटा सा पसरा सजाकर मिट्टी के दीये बेच रही मीरा के लिए यह दिन बेहद खास और ऐतिहासिक बन गया। मुख्यमंत्री के काफिले का अचानक उसके पसरे के सामने रुकना इस बात का प्रमाण था कि राज्य सरकार समाज के सबसे छोटे और अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति की सुधि लेने के लिए पूरी तरह तत्पर है।
बिना किसी पूर्व निर्धारित औपचारिकता के मुख्यमंत्री श्री साय सीधे मीरा के पास पहुंचे और बड़े आत्मीय स्वभाव से उसके कामकाज के साथ-साथ उसके परिवार का हालचाल जाना। इस दौरान उन्होंने मीरा से यह भी जानकारी ली कि उसे केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। मुख्यमंत्री के इस सहज और संवेदनशील व्यवहार ने वहां मौजूद आम नागरिकों का भी दिल जीत लिया।
बातचीत के दौरान मीरा ने मुख्यमंत्री को बताया कि प्रधानमंत्री जनधन योजना के अंतर्गत उसका बैंक खाता खुल चुका है, जिससे वित्तीय लेन-देन आसान हुआ है। इसके साथ ही उसने बेहद प्रसन्नता के साथ साझा किया कि छत्तीसगढ़ सरकार की महत्वाकांक्षी ‘महतारी वंदन योजना’ के तहत उसे हर महीने एक हजार रुपए की आर्थिक सहायता मिल रही है। यह सुनकर मुख्यमंत्री ने गहरी संतुष्टि व्यक्त की।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाएं तभी अपनी सार्थकता सिद्ध करती हैं, जब उनका लाभ पूरी पारदर्शिता और सहजता के साथ सीधे जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचे। उन्होंने प्रधानमंत्री जनधन योजना के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि इसने गरीब और वंचित परिवारों को बैंकिंग व्यवस्था से जोड़कर आर्थिक समावेशन का एक मजबूत और सुरक्षित आधार तैयार किया है।
महतारी वंदन योजना का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस योजना के माध्यम से प्रदेश की माताओं और बहनों को हर महीने आर्थिक संबल मिल रहा है। यह राशि न केवल उनके दैनिक और छोटे-छोटे खर्चों को पूरा करने में मददगार साबित हो रही है, बल्कि उनमें एक नया आर्थिक आत्मविश्वास भी जगा रही है। सरकार का उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना है।
इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने सड़क किनारे पसरा लगाने वाले छोटे विक्रेताओं, कुम्हारों, शिल्पकारों और स्थानीय उत्पाद तैयार करने वाली महिलाओं के श्रम को आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ की असली ताकत बताया। उन्होंने कहा कि अपने हुनर और कड़ी मेहनत से आजीविका कमाने वाले ऐसे मेहनतकश लोगों को प्रोत्साहित करना हम सभी की सामूहिक सामाजिक जिम्मेदारी है।
लोकल फॉर वोकल के विचार को आगे बढ़ाते हुए मुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों से अपील की कि वे स्थानीय उत्पादों को अपनाएं। उन्होंने समझाया कि किसी स्थानीय कारीगर या छोटे व्यवसायी से सामान खरीदना केवल एक वस्तु का सौदा नहीं है, बल्कि यह उनके आत्मसम्मान, श्रम और परिवार की आजीविका को संबल प्रदान करने का एक पवित्र प्रयास है।
अंत में, मुख्यमंत्री श्री साय ने मीरा के पसरे से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के अंतर्गत आयोजित होने वाले ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम के लिए एक मिट्टी का दीया खरीदा और उसे एक हजार रुपए प्रदान किए। यह छोटा सा दीया अब सेवा, जनभागीदारी और विकास के संकल्प का प्रतीक बन गया है, जो यह संदेश देता है कि समाज के सामूहिक प्रयासों से ही एक बड़े और सकारात्मक बदलाव का मार्ग प्रशस्त होता है।

