रायपुर, 06 अप्रैल 2026: छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आर्थिक रूप से कमजोर और वंचित समूह के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष प्रयास कर रही है। वर्तमान में प्रदेश के 6,862 निजी स्कूलों में लगभग 3,63,515 विद्यार्थी इस अधिनियम के माध्यम से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं, जो राज्य की समावेशी शिक्षा नीति की एक बड़ी उपलब्धि है।
अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार, राज्य के सभी गैर-अनुदान प्राप्त अशासकीय विद्यालयों को अपनी प्रारंभिक कक्षाओं (नर्सरी या कक्षा पहली) में 25 प्रतिशत सीटें आरक्षित करना अनिवार्य है। इन सीटों पर प्रवेश पाने वाले बच्चों की पढ़ाई का खर्च राज्य सरकार वहन करती है। सरकार प्रति बच्चा व्यय के आधार पर स्कूलों को प्रतिपूर्ति राशि का भुगतान करती है, जो सरकारी स्कूल के खर्च या निजी स्कूल की वास्तविक फीस में से जो भी कम हो, उसके आधार पर तय की जाती है।

छत्तीसगढ़ में दी जाने वाली प्रतिपूर्ति राशि पड़ोसी राज्यों की तुलना में काफी बेहतर और संतुलित है। जहाँ छत्तीसगढ़ में कक्षा पहली से पांचवीं तक के लिए 7,000 रुपये और कक्षा छठवीं से आठवीं तक के लिए 11,400 रुपये वार्षिक प्रतिपूर्ति दी जा रही है, वहीं मध्य प्रदेश (₹4,419), उत्तर प्रदेश (₹5,400) और बिहार (₹6,569) जैसे राज्यों में यह राशि कम है। हालांकि ओडिशा और कर्नाटक जैसे राज्यों में यह दर अधिक है, लेकिन छत्तीसगढ़ शासन का मानना है कि वर्तमान दरें स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार पूरी तरह उचित हैं।
शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि इस वर्ष भी कक्षा पहली की लगभग 22,000 सीटों पर प्रवेश की प्रक्रिया सुचारू रूप से जारी है। चूंकि निजी स्कूलों को मान्यता ही आर.टी.ई. के नियमों के पालन की शर्त पर दी जाती है, इसलिए पात्र बच्चों को प्रवेश देना उनकी वैधानिक जिम्मेदारी है। सरकार का लक्ष्य है कि निवास क्षेत्र के भीतर आने वाले हर जरूरतमंद बच्चे को बिना किसी बाधा के अच्छे स्कूलों में पढ़ने का अवसर मिले।
सरकार ने उन निजी स्कूलों को कड़ी चेतावनी दी है जो आर.टी.ई. के तहत बच्चों को प्रवेश देने में आनाकानी करते हैं या नियमों का उल्लंघन करते हैं। शासन ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि कोई विद्यालय प्रवेश प्रक्रिया में व्यवधान डालता है, तो उसके विरुद्ध कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। इसमें विद्यालय की आधिकारिक मान्यता समाप्त करने जैसा सख्त कदम भी शामिल है, ताकि व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।
अंत में, शिक्षा विभाग ने आम जनता और अभिभावकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या अन्य माध्यमों से फैलाई जा रही किसी भी भ्रामक जानकारी पर भरोसा न करें। विभाग ने जोर दिया है कि किसी भी समस्या या जानकारी के लिए केवल आधिकारिक तथ्यों और विभागीय सूचनाओं को ही आधार बनाएं। सरकार का मुख्य उद्देश्य अंतिम पंक्ति के व्यक्ति तक शिक्षा का अधिकार पहुँचाना है।

