नई दिल्ली/रायपुर: छत्तीसगढ़ में रेल कनेक्टिविटी और आर्थिक विकास को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए रेल मंत्रालय ने अपनी प्रतिबद्धता दोहराई है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में राज्य की रेल परियोजनाओं की प्रगति साझा करते हुए बताया कि छत्तीसगढ़ के रेलवे बजट आवंटन में ऐतिहासिक 22 गुना की वृद्धि की गई है। यह निवेश राज्य के बुनियादी ढांचे को आधुनिक बनाने और यात्रियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है, जिससे आने वाले समय में छत्तीसगढ़ के परिवहन परिदृश्य में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
अमृत भारत स्टेशन योजना (ABSS) के तहत मंत्रालय ने छत्तीसगढ़ के कुल 32 रेलवे स्टेशनों को पुनर्विकास के लिए चिह्नित किया है। इन स्टेशनों को आधुनिक स्वरूप देने का कार्य युद्ध स्तर पर चल रहा है। राहत की बात यह है कि अंबिकापुर, भानुप्रतापपुर, भिलाई, डोंगरगढ़ और उरकुरा जैसे पांच प्रमुख स्टेशनों पर आधुनिकीकरण का कार्य सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है। इन स्टेशनों पर अब यात्रियों को बेहतर वेटिंग हॉल, मल्टीमॉडल इंटीग्रेशन और दिव्यांगजनों के लिए विशेष सुविधाओं के साथ-साथ सुगम पहुंच मार्ग का लाभ मिल रहा है।
सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने केंद्र सरकार के इस प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि बजट में हुई यह रिकॉर्ड वृद्धि राज्य के नागरिकों के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाती है। उन्होंने विश्वास जताया कि नई रेल लाइनें और फ्रेट कॉरिडोर नेटवर्क की भीड़भाड़ को कम करेंगे और राज्य की आर्थिक समृद्धि के लिए एक ‘पावरफुल इंजन’ के रूप में काम करेंगे। अग्रवाल के अनुसार, ये सुधार न केवल यात्रा को सुखद बनाएंगे बल्कि स्थानीय व्यापार और उद्योगों को भी नई गति प्रदान करेंगे।
परियोजनाओं के आंकड़ों पर गौर करें तो वर्तमान में छत्तीसगढ़ में लगभग ₹31,619 करोड़ की कुल 26 बड़ी परियोजनाएं स्वीकृत हैं। इनमें 6 नई रेल लाइनें और 20 दोहरीकरण व मल्टीट्रैकिंग की पहल शामिल है, जो कुल 1,932 किलोमीटर की लंबाई कवर करती हैं। विशेष रूप से सामरिक महत्व वाली दल्लीराजहरा-रावघाट-जगदलपुर नई लाइन परियोजना में तेजी आई है, जहां दल्लीराजहरा से तारोकी तक 77 किमी का खंड चालू हो गया है और तारोकी-रावघाट के 18 किमी के हिस्से का काम भी पूरा कर लिया गया है।
औद्योगिक मोर्चे पर छत्तीसगढ़ को बड़ा लाभ मिलने वाला है क्योंकि नवनिर्मित डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (DFC) राज्य के बीच से होकर गुजरेगा। यह कॉरिडोर डानकुनी और सूरत को जोड़ेगा, जिससे माल ढुलाई और लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में क्रांतिकारी सुधार होगा। इस समर्पित कॉरिडोर के माध्यम से राज्य के कोयला, इस्पात और अन्य उद्योगों के उत्पादों को देश के अन्य हिस्सों तक पहुँचाना बेहद आसान और किफायती हो जाएगा, जो सीधे तौर पर राज्य के राजस्व में वृद्धि करेगा।
अंततः, रेल मंत्रालय का यह व्यापक दृष्टिकोण छत्तीसगढ़ को एक सुरक्षित, आधुनिक और उच्च क्षमता वाले रेल नेटवर्क से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है। सरकार का लक्ष्य है कि राज्य का कोई भी हिस्सा रेल संपर्क से अछूता न रहे और हर यात्री को यात्रा के दौरान सुरक्षा के साथ-साथ आधुनिक सुख-सुविधाओं का अनुभव हो। रेल नेटवर्क का यह विस्तार न केवल कनेक्टिविटी बढ़ाएगा बल्कि छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख औद्योगिक और पर्यटन केंद्र के रूप में भी मजबूती से स्थापित करेगा।

