पुरी: पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। बुधवार शाम को जब मंदिर के भीतर अति-संवेदनशील ‘रत्न भंडार’ के खजाने की गिनती चल रही थी, उसी समय मंदिर के ऊपर प्रतिबंधित क्षेत्र में ड्रोन उड़ते हुए देखे गए। इस घटना ने प्रशासन और श्रद्धालुओं के बीच हड़कंप मचा दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शाम करीब 5:23 बजे दो ड्रोन मंदिर के मुख्य शिखर ‘नीलाचक्र’ के आसपास मंडराते पाए गए। यह वाकया उस समय हुआ जब मंदिर की महत्वपूर्ण दैनिक परंपरा ‘पतितपावन बाना’ (ध्वज) को बदलने की रस्म निभाई जा रही थी। इतनी ऊंचाई पर ड्रोन का पहुंचना सुरक्षा घेरे में बड़ी सेंध माना जा रहा है।
हैरानी की बात यह है कि यह उल्लंघन तब हुआ जब रत्न भंडार के आभूषणों और रत्नों के सत्यापन के कारण पूरा मंदिर परिसर छावनी में तब्दील था। इतने कड़े पहरे के बावजूद बाहरी उपकरणों का मुख्य मंदिर के इतने करीब पहुंच जाना सुरक्षा एजेंसियों की मुस्तैदी पर सवालिया निशान लगाता है।
घटना के दौरान सिंहद्वार के पास तैनात सुरक्षाकर्मियों की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। बताया जा रहा है कि ड्रोन दिखने के काफी देर बाद तक भी जमीनी स्तर पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो सकी। इससे मंदिर को ‘नो-फ्लाई ज़ोन’ घोषित किए जाने के दावों और तकनीकी निगरानी की पोल खुलती नजर आई।
हालांकि, बाद में सक्रिय हुई सिंहद्वार पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए दो संदिग्धों को हिरासत में ले लिया है। पुलिस ने उनके पास से ड्रोन भी ज़ब्त कर लिए हैं। फिलहाल पुलिस और खुफिया एजेंसियां पकड़े गए व्यक्तियों से पूछताछ कर रही हैं ताकि यह पता लगाया जा सके कि ड्रोन उड़ाने का मकसद केवल फोटोग्राफी था या इसके पीछे कोई गहरी साजिश थी।
यह पहली बार नहीं है जब 12वीं सदी के इस विश्व प्रसिद्ध मंदिर के ऊपर ड्रोन देखे गए हों। पहले भी ऐसी कई घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन बार-बार होने वाली इन चूकों ने सुरक्षा के दावों को खोखला साबित किया है। स्थानीय लोगों और भक्तों ने मांग की है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए मंदिर के आसपास ‘एंटी-ड्रोन सिस्टम’ लगाया जाए।

