भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच लंबे समय से विचाराधीन मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर एक बहुत ही सकारात्मक और ऐतिहासिक घटनाक्रम सामने आया है। इस बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते पर औपचारिक रूप से हस्ताक्षर होने और इसे अंतिम मुहर मिलने से पहले ही, यूरोपीय संघ ने भारत को कई बड़े और रणनीतिक तोहफे देने शुरू कर दिए हैं। इन अग्रिम रियायतों से दोनों अर्थव्यवस्थाओं के बीच आर्थिक और व्यापारिक रिश्ते और अधिक मजबूत होते नजर आ रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि औपचारिक एफटीए लागू होने में अभी कुछ कानूनी प्रक्रियाओं और दस्तावेजों का वक्त बाकी है, लेकिन यूरोपीय संघ द्वारा दी गई ये शुरुआती राहतें भारतीय निर्यातकों के लिए एक बड़ी राहत और उत्साह बढ़ाने वाली खबर हैं। इन फैसलों से न केवल भारतीय उद्योगों को वैश्विक स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत करने का मौका मिल रहा है, बल्कि भारत और यूरोपीय देशों के बीच व्यापारिक अड़चनें भी तेजी से कम हो रही हैं।
इस सिलसिले में सबसे बड़ा फायदा स्टील सेक्टर को मिला है, जहाँ भारत को यूरोपीय बाजार में सालाना 2.8 मिलियन टन यानी 28 लाख टन स्टील बिना किसी आयात शुल्क (Duty-Free) के भेजने का भारी-भरकम कोटा प्राप्त हुआ है। यह कोटा भारतीय स्टील निर्माताओं के लिए एक बहुत बड़ी उपलब्धि है, क्योंकि इससे यूरोपीय देशों की भारी मांग को पूरा करने में आसानी होगी और यूरोपीय बाजार में भारतीय स्टील की प्रतिस्पर्धात्मकता कई गुना बढ़ जाएगी।
इसके साथ ही, कृषि और खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र के लिए भी बहुत अच्छी खबर सामने आई है। भारत की 625 से अधिक मछली और सीफूड प्रसंस्करण इकाइयों को यूरोपीय बाजारों में सीधे अपने उत्पाद भेजने की आधिकारिक मंजूरी मिल गई है। इसके तहत भारतीय झींगा (Shrimps) और अन्य उच्च गुणवत्ता वाले समुद्री उत्पादों का निर्यात अब बिना किसी अतिरिक्त बाधा के यूरोपीय देशों के बाजारों तक आसानी से पहुँच सकेगा।
पर्यावरण और समुद्री उद्योग के मोर्चे पर भी भारत को एक बड़ी वैश्विक मान्यता मिली है। अमेरिका के बाद भारत दुनिया का दूसरा ऐसा देश बन गया है, जिसे यूरोपीय संघ ने अपने कड़े और आधुनिक पर्यावरण तथा सुरक्षा मानकों के अनुरूप ‘शिपब्रेकिंग और रिसाइक्लिंग’ के लिए पूरी तरह अधिकृत किया है। इस क्षेत्र में गुजरात के अलंग जैसे प्रमुख शिपयार्ड्स को इसका सबसे बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है, जिससे रोजगार और रीसाइक्लिंग उद्योग को नई गति मिलेगी।
इन तमाम अग्रिम रियायतों और सेक्टर-वाइज फायदों के अलावा, जब यह व्यापक मुक्त व्यापार समझौता पूरी तरह से लागू हो जाएगा, तो इसका दायरा और भी अधिक विस्तृत होगा। आधिकारिक अनुमानों के अनुसार, कपड़ा, चमड़ा, इंजीनियरिंग के सामान और फार्मास्यूटिकल्स जैसे प्रमुख भारतीय क्षेत्रों के लगभग 99% से अधिक उत्पादों को यूरोप में या तो बिल्कुल शून्य ड्यूटी पर या फिर बेहद कम शुल्क पर प्रवेश मिलेगा।
वर्तमान स्थिति यह है कि भारत और यूरोपीय संघ ने इस ऐतिहासिक समझौते की वार्ताओं को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया है। अब यूरोपीय आयोग द्वारा इसके औपचारिक प्रस्ताव को यूरोपीय काउंसिल को सौंपे जाने की प्रक्रिया चल रही है। उम्मीद जताई जा रही है कि इसी साल के अंत तक इस पर हस्ताक्षर हो जाएंगे और वर्ष 2027 तक यह समझौता पूरी तरह से जमीन पर लागू होकर दोनों पक्षों के लिए गेम-चेंजर साबित होगा।

