भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने देश के हाइवे पर सड़क सुरक्षा और यातायात प्रबंधन को पूरी तरह चुस्त-दुरस्त बनाने के लिए एक बेहद सख्त कदम उठाया है। अब हाइवे पर वीडियो निगरानी प्रणाली और आपातकालीन सेवाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की कोताही या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि संबंधित एजेंसियों या ऑपरेटरों की तरफ से नियमों के पालन में ढिलाई बरती जाती है, तो उन पर एक लाख रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना ठोका जा सकता है।
नेशनल हाईवे की इलेक्ट्रॉनिक निगरानी के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण चरणबद्ध तरीके से पूरे हाईवे नेटवर्क को एडवांस ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) से लैस कर रहा है। इसका प्रमुख उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना है, लेकिन विडंबना यह है कि जहां यह लागू हो चुका है, उनमें से कई परियोजनाओं पर एटीएमएस के उपकरण निष्क्रिय पड़े हैं। ऑडिट और निरीक्षण में ऐसी कमियां सामने आने के बाद खुद NHAI चिंतित है और इसे सड़क सुरक्षा से सीधा समझौता मानते हुए नियमों को सख्त करने का निर्णय लिया है।
इस नई व्यवस्था के तहत हाइवे पर होने वाली दुर्घटनाओं और अन्य बाधाओं से निपटने के लिए एक चुस्त इंसिडेंट मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि हाइवे पर कोई भी हादसा होने की स्थिति में राहत और बचाव दल बिना किसी देरी के तुरंत मौके पर पहुंचे। इसके लिए लाइव वीडियो फीड और कैमरों के जरिए कंट्रोल रूम से पूरे हाइवे नेटवर्क पर लगातार पैनी नजर रखी जा रही है।
सड़क सुरक्षा से समझौता न करने के संकल्प के साथ NHAI ने नए दिशा-निर्देश जारी करते हुए कहा है कि यातायात निगरानी और प्रवर्तन को सख्त बनाने के लिए बड़ी संख्या में नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे परियोजनाओं पर एटीएमएस को लागू किया गया है। हालांकि, निरीक्षण और ऑडिट के माध्यम से यह देखा गया है कि ऐसी कई परियोजनाओं पर एटीएमएस के ऑपरेशन एंड मेंटेनेंस की पर्याप्त निगरानी नहीं की जा रही है, जिसके कारण महत्वपूर्ण एटीएमएस उपकरणों की गंभीर निष्क्रियता सामने आई है।
प्राधिकरण ने एटीएमएस और निगरानी में कमियां पाए जाने पर नेशनल हाईवे परियोजनाओं के सभी प्रमुख मॉडल—बिल्ट, ऑपरेट, ट्रांसफर (बीओटी), इंजीनियरिंग, प्रोक्योरमेंट एंड कंस्ट्रक्शन (ईपीसी) और हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम)—में कड़े अर्थदंड का प्रावधान शामिल किया है। नियमों के मुताबिक, यदि दुर्घटना के बाद मौके पर एम्बुलेंस, क्रेन या पेट्रोलिंग गाड़ियां तय समयसीमा के भीतर नहीं पहुंचती हैं, तो अधिकारियों या ऑपरेटरों पर प्रति त्रुटि 5,000 रुपये से 10,000 रुपये तक का जुर्माना लगाया जाता है, जो अधिकतम एक लाख रुपये तक हो सकता है।
केवल वाहनों की देरी ही नहीं, बल्कि कैमरों के खराब मिलने, फीड में रुकावट आने, या एम्बुलेंस व पेट्रोलिंग वाहनों में जीपीएस, टैबलेट और अन्य अनिवार्य उपकरण बंद मिलने पर भी NHAI कड़ी कार्रवाई कर रहा है। हर बार निरीक्षण के दौरान कमियां पाए जाने पर भारी जुर्माना वसूला जाता है, और अनिवार्य मोबाइल ऐप्स का उपयोग न करने पर प्रतिदिन के हिसाब से दंड तय किया गया है।
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने भी देश के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर बढ़ती दुर्घटनाओं और सुरक्षा व्यवस्था की कमियों को लेकर गहरी नाराजगी व्यक्त की थी। सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के बाद NHAI ने अपनी निगरानी प्रणाली को और अधिक पारदर्शी बनाने का यह बड़ा फैसला लिया है। इस डिजिटल निगरानी प्रणाली के मजबूत होने से सड़क हादसों में तुरंत राहत मिलने के साथ-साथ अवैध पार्किंग और यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भी कड़ा शिकंजा कसा जा सकेगा।
NHAI के इस सख्त फैसले से हाइवे पर काम करने वाली निजी एजेंसियों और ऑपरेटरों में हड़कंप मच गया है। अधिकारियों का मानना है कि इस प्रकार के आर्थिक दंड और कड़े प्रावधानों से व्यवस्था में सुधार आएगा, जिससे हाइवे पर सफर करने वाले आम नागरिकों की यात्रा पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और सुगम हो सकेगी।

