नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने टिकटों की कालाबाजारी पर लगाम कसने और आम यात्रियों को कन्फर्म टिकट उपलब्ध कराने के उद्देश्य से अपने रिफंड नियमों में बड़ा बदलाव किया है। आगामी 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच लागू होने वाले इन नए नियमों के तहत अब टिकट कैंसिल कराने पर मिलने वाली रिफंड राशि को समय सीमा के आधार पर कड़ा कर दिया गया है। रेलवे का मानना है कि इन सख्त नियमों से उन दलालों पर रोक लगेगी जो एडवांस में टिकट बुक कर लेते हैं और आखिरी समय में उन्हें रद्द करते हैं।
नए नियमों के अनुसार, अब यात्रियों को टिकट कैंसिल कराने के लिए बहुत पहले निर्णय लेना होगा। यदि कोई यात्री ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 8 घंटे पहले टिकट रद्द करता है, तो उसे एक भी रुपया रिफंड के रूप में नहीं मिलेगा। वहीं, यदि टिकट प्रस्थान से 8 घंटे और 24 घंटे के बीच कैंसिल कराया जाता है, तो यात्री को जमा की गई राशि का केवल 50% हिस्सा ही वापस मिल सकेगा। इसका सीधा अर्थ है कि देरी से लिया गया फैसला यात्री की जेब पर भारी पड़ने वाला है।
इसके अतिरिक्त, रेलवे ने मध्यम अवधि के कैंसिलेशन के लिए भी स्लैब तय किए हैं। यदि कोई यात्री अपनी यात्रा से 72 घंटे पहले तक टिकट रद्द कराता है, तो उसे 75% तक रिफंड मिल सकेगा। इन नियमों को मुख्य रूप से 1 अप्रैल से 15 अप्रैल के बीच ट्रायल और कार्यान्वयन के चरण में रखा गया है। यात्रियों की सुविधा के लिए अब यह प्रावधान भी किया गया है कि वे किसी भी स्टेशन से ‘ऑफलाइन मोड’ में अपना टिकट कैंसिल करा सकेंगे, जिससे उन्हें अपने मूल बोर्डिंग स्टेशन तक जाने की मजबूरी नहीं रहेगी।
सख्ती के साथ-साथ रेलवे ने यात्रियों को कुछ विशेष विकल्प भी दिए हैं। अब यात्रियों के पास ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक अपनी सीट, कोच और क्लास अपग्रेड करने का विकल्प होगा। उदाहरण के लिए, यदि ट्रेन में जगह खाली है, तो यात्री अपनी 3rd AC की सीट को 1st AC में अपग्रेड करा सकेंगे। यह सुविधा उन लोगों के लिए बेहद मददगार साबित होगी जिन्हें अंतिम समय में आरामदायक सफर की तलाश होती है।
कैंसिलेशन के सख्त नियमों के साथ-साथ रेलवे ने यात्रियों को कुछ राहत भी दी है। अब यात्री ट्रेन छूटने के 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं, जो पहले चार्ट बनने से पहले करना अनिवार्य था। इसके अलावा, यदि ट्रेन में सीटें खाली हैं, तो यात्री चार्ट बनने के बाद भी अपनी क्लास अपग्रेड (जैसे स्लीपर से 3AC) करा सकेंगे। ई-टिकट धारकों के लिए राहत की बात यह है कि ट्रेन कैंसिल होने की स्थिति में अब TDR भरने की जरूरत नहीं होगी, रिफंड सीधे बैंक खाते में क्रेडिट कर दिया जाएगा।
दलालों और फर्जी टिकटों पर लगाम लगाने के लिए रेलवे ने अब तत्काल टिकट बुकिंग के दौरान आधार वेरिफिकेशन को अनिवार्य कर दिया है। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि वास्तविक यात्रियों को ही कन्फर्म टिकट मिल सके। इन नए नियमों के लागू होने से जहाँ एक ओर अनुशासन बढ़ेगा, वहीं दूसरी ओर उन यात्रियों को परेशानी हो सकती है जिन्हें अचानक किसी कारणवश अपनी यात्रा रद्द करनी पड़ती है।
कुल मिलाकर, ये नए नियम जहाँ एक ओर रिफंड के मामले में यात्रियों को सतर्क रहने की चेतावनी दे रहे हैं, वहीं दूसरी ओर सफर के दौरान क्लास अपग्रेडेशन जैसी आधुनिक सुविधाएं भी प्रदान कर रहे हैं।
डिस्क्लेमर: उपरोक्त जानकारी रिपोर्ट्स और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर दी गई है। भारतीय रेलवे समय-समय पर अपने नियमों और शुल्क में बदलाव करता रहता है। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि किसी भी टिकट को कैंसिल करने या यात्रा की योजना बनाने से पहले रेलवे की आधिकारिक वेबसाइट www.irctc.co.in या NTES ऐप पर जाकर वर्तमान नियमों की पुन: जांच अवश्य कर लें। किसी भी विसंगति की स्थिति में रेलवे द्वारा जारी आधिकारिक अधिसूचना ही मान्य होगी।

