ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (BBC) के खिलाफ चल रहे 10 अरब डॉलर के बहुचर्चित मानहानि मुकदमे में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बड़ा कानूनी झटका लगा है। अदालत ने ट्रंप को स्पष्ट निर्देश देते हुए अपने बयान दर्ज कराने (डिपोजिशन) के लिए 11 दिसंबर की आखिरी समय-सीमा तय कर दी है। इस मामले में कोर्ट का यह रुख ट्रंप के लिए एक बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
अदालत ने इस मामले में काफी सख्त रुख अपनाते हुए ट्रंप को चेतावनी दी है कि यदि वे तयशुदा समय-सीमा के भीतर शपथ के तहत अपना बयान दर्ज नहीं कराते हैं, तो उन पर कड़े कानूनी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। इन संभावित प्रतिबंधों में इस बड़े मुकदमे को सिरे से खारिज किया जाना भी शामिल है, जिससे ट्रंप की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।
यह पूरा कानूनी विवाद मुख्य रूप से 6 जनवरी के एक भाषण की कथित भ्रामक एडिटिंग को लेकर शुरू हुआ था। ट्रंप का आरोप है कि बीबीसी ने उनके भाषण को गलत तरीके से पेश किया, जिससे उनकी प्रतिष्ठा को भारी नुकसान पहुंचा। इस मामले के तूल पकड़ने पर बीबीसी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए पहले ही सार्वजनिक माफी मांग ली थी।
माफी मांगने के इस घटनाक्रम के बाद बीबीसी के कई शीर्ष अधिकारियों को अपने पदों से इस्तीफा भी देना पड़ा था। हालांकि, अपनी आंतरिक कार्रवाई और माफी के बावजूद, बीबीसी ने ट्रंप द्वारा लगाए गए मानहानि के सभी दावों को सिरे से खारिज किया है और कानूनी रूप से अपना बचाव जारी रखा है।
इससे पहले, 16 अक्टूबर को ट्रंप का बयान दर्ज किया जाना तय हुआ था, लेकिन उन्होंने अपने व्यस्त राजनीतिक अभियानों और अन्य प्रशासनिक व्यस्तताओं का हवाला देकर इसे रद्द करा दिया था। इसके बाद बीबीसी के वकीलों ने कोर्ट में आपत्ति जताते हुए आरोप लगाया था कि ट्रंप इस कानूनी प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं ले रहे हैं।
बीबीसी के वकीलों की आपत्तियों और दलीलों पर सुनवाई करते हुए अमेरिकी मजिस्ट्रेट जज एंजोलिक लेट ने आखिरकार यह सख्त समय-सीमा तय की है। अदालत के इस हस्तक्षेप से यह साफ हो गया है कि अब ट्रंप को अपनी व्यस्तताओं के बावजूद इस कानूनी प्रक्रिया का अनिवार्य रूप से पालन करना ही होगा।
इसके साथ ही, अदालत ने इस हाई-प्रोफाइल मामले में वीडियो रिकॉर्डिंग को लेकर भी एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि ट्रंप के बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग की जा सकती है, लेकिन इसकी फुटेज पूरी तरह गोपनीय रहेगी और यह केवल दोनों पक्षों के वकीलों तक ही सीमित होगी, जिसे किसी भी स्थिति में सार्वजनिक नहीं किया जाएगा।

