जगदलपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर जिला मुख्यालय जगदलपुर में वन्यजीव तस्करी के खिलाफ कार्रवाई करने गई वन विभाग की टीम पर जानलेवा हमला होने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। दरअसल, वन विभाग की फ्लाइंग स्क्वॉड टीम को सूचना मिली थी कि इलाके में नवजात तोतों की अवैध तरीके से खरीद-फरोख्त की जा रही है। इस सूचना पर जैसे ही टीम मौके पर पहुंची और कार्रवाई शुरू की, वहां मौजूद तस्करों और स्थानीय लोगों के एक समूह ने टीम को घेर लिया और विरोध करना शुरू कर दिया।
देखते ही देखते यह विरोध हिंसक झड़प में तब्दील हो गया। आरोप है कि मौके पर मौजूद अवैध विक्रेताओं और उनके समर्थकों ने फ्लाइंग स्क्वॉड प्रभारी अक्षय कश्यप और उनके साथ मौजूद रेंजर पर हमला बोल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, स्थिति इतनी भयावह थी कि उग्र भीड़ ने रेंजर को पकड़कर एक खंभे से बांध दिया और उनके साथ बेरहमी से मारपीट की। सरकारी अमले पर इस तरह के हमले ने इलाके में कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुँचा और स्थिति को नियंत्रित किया। घायल वन कर्मियों को उपचार के लिए भेजा गया है। पुलिस ने इस मामले में तत्परता दिखाते हुए हमलावरों की पहचान कर ली है और उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। पुलिस का कहना है कि सरकारी काम में बाधा डालने और लोक सेवकों के साथ हिंसा करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
दर्ज की गई FIR में मुख्य रूप से धारा 296 (गाली-गलौज), 351 (धमकी), 121 (लोक सेवक को कर्तव्य से रोकना), 132 (हमला), और 221 के साथ-साथ धारा 3(5) शामिल की गई है। पुलिस की जांच अब दो दिशाओं में चल रही है: पहला, उन लोगों की धरपकड़ जिन्होंने वन विभाग की टीम पर हमला किया और दूसरा, उस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना जो इलाके में प्रतिबंधित पक्षियों और वन्यजीवों की अवैध तस्करी में लिप्त है।
इस घटना के बाद से पूरे जगदलपुर क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है। वन विभाग के कर्मचारियों में इस हमले को लेकर भारी आक्रोश है और उन्होंने दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वन्यजीवों का व्यापार एक दंडनीय अपराध है और इस तरह के अवैध कार्यों को रोकने के लिए विभाग का अभियान और अधिक सख्ती के साथ जारी रहेगा।
फिलहाल, पुलिस आरोपियों की तलाश में छापेमारी कर रही है और इलाके के संदिग्ध ठिकानों पर नजर रखी जा रही है। वन विभाग ने भी अपनी गश्त बढ़ा दी है ताकि भविष्य में ऐसी किसी अप्रिय घटना की पुनरावृत्ति न हो। जांच अधिकारियों का मानना है कि इस हमले के पीछे कोई बड़ा गिरोह हो सकता है जो पकड़े जाने के डर से हिंसा पर उतारू हो गया।

