बिलासपुर: छत्तीसगढ़ की न्यायधानी में बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन एक तरफ तो सख्ती के बड़े-बड़े दावे कर रहा है, लेकिन दूसरी तरफ जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासन ने चिकन दुकानों को बंद करने और पोल्ट्री उत्पादों की बिक्री पर पाबंदी के आदेश तो जारी कर दिए हैं, लेकिन शहर के मुख्य प्रवेश द्वारों पर निगरानी पूरी तरह नदारद है। यह स्थिति तब और स्पष्ट हो गई जब रविवार को बिलासपुर रेलवे स्टेशन पर दिल्ली से मंगाए गए चूजों की एक बड़ी खेप बिना किसी रोक-टोक के उतारी गई।
हैरानी की बात यह है कि जब बर्ड फ्लू के कारण पोल्ट्री कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाए गए हैं, तब इतनी बड़ी संख्या में चूजों की सप्लाई खुलेआम कैसे की जा रही है। स्टेशन परिसर में चूजों को उतारने के दौरान न तो रेलवे प्रशासन की ओर से कोई थर्मल स्क्रीनिंग या सुरक्षा इंतजाम दिखे और न ही जिला प्रशासन की कोई टीम वहां मौजूद थी। बिना किसी पीपीई किट या बायो-सुरक्षा उपायों के, चूजों को जिस तरह से खुले में हैंडल किया गया, वह शहर में संक्रमण फैलने का सीधा निमंत्रण है।
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि दर्जनों बॉक्स में भरे चूजों को स्टेशन पर बिना किसी डर या जांच के रखा गया है। इस घटना ने प्रशासन की कार्यप्रणाली और उनके द्वारा जारी ‘सख्ती’ के आदेशों की पोल खोल दी है। स्थानीय लोगों में इस बात को लेकर काफी आक्रोश है कि यदि प्रशासन छोटे दुकानदारों का धंधा बंद करा रहा है, तो फिर बाहरी राज्यों से संक्रमण लाने वाली इन खेप को शहर में घुसने की अनुमति कैसे मिल रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की लापरवाही बिलासपुर में बर्ड फ्लू के खतरे को कई गुना बढ़ा सकती है। प्रशासन के लिए अब यह चुनौती है कि वे न केवल इस सप्लाई चेन की जांच करें, बल्कि यह भी सुनिश्चित करें कि प्रतिबंधों का पालन सभी स्तरों पर समान रूप से हो। यदि समय रहते इन ‘लूपहोल्स’ को नहीं भरा गया, तो स्थिति हाथ से बाहर निकल सकती है।

