अमेरिका के मिड-टर्म चुनावों के नजदीक आते ही राजनीतिक पारा अपने चरम पर पहुंच गया है। पारंपरिक रूप से रिपब्लिकन पार्टी के सुरक्षित गढ़ माने जाने वाले राज्यों में इस बार कांटे की टक्कर देखने को मिल रही है, जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और उनकी पार्टी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। कंसास, टेक्सस और साउथ कैरोलिना जैसे राज्यों में डेमोक्रेटिक उम्मीदवारों की मजबूत चुनौती ने रिपब्लिकन खेमे की नींद उड़ा दी है।
इन चुनावों में कंसास और टेक्सस जैसे राज्यों की सीटें अब पूरी तरह से ‘टॉस-अप’ यानी बेहद कड़े मुकाबले वाली श्रेणियों में बदल चुकी हैं। कंसास में सीनेट की सीट पर रिपब्लिकन सांसद और डेमोक्रेटिक चुनौती के बीच मुकाबला दिलचस्प हो गया है। जानकारों का मानना है कि यदि रिपब्लिकन पार्टी इन पारंपरिक सीटों पर पिछड़ती है, तो अमेरिकी संसद (कांग्रेस) पर नियंत्रण खोने का खतरा पैदा हो सकता है।
साउथ कैरोलिना का हाल भी रिपब्लिकन पार्टी के लिए चिंता का विषय बना हुआ है। इस क्षेत्र को भी अब एक कड़े बैटलग्राउंड के रूप में देखा जा रहा है, जहां पार्टी को अपनी साख बचाने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ रही है। महंगाई, अर्थव्यवस्था और आव्रजन जैसे मुद्दों पर मतदाताओं के असंतोष ने डेमोक्रेट्स के लिए जमीन मजबूत कर दी है।
मतदाताओं के कड़े रुख और शुरुआती मतदान (अर्ली वोटिंग) के चौंकाने वाले रुझानों को देखते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को अपनी चुनावी रणनीतियों में बदलाव करना पड़ा है। समर्थन जुटाने और अपने वोटर बेस को सक्रिय करने के लिए ट्रंप ने कंसास और अन्य महत्वपूर्ण राज्यों में अंतिम समय में रैलियों के अपने कार्यक्रम को फिर से बहाल किया है।
यह पूरा मिड-टर्म चुनाव राष्ट्रपति ट्रंप के मौजूदा कार्यकाल और नीतियों पर एक प्रकार का जनमत संग्रह बन चुका है। यदि इन पारंपरिक गढ़ों में रिपब्लिकन पार्टी को झटका लगता है, तो राष्ट्रपति ट्रंप के लिए अपने एजेंडे को आगे बढ़ाना और संसद में बहुमत बनाए रखना बेहद कठिन हो जाएगा।

