छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में शांति, विकास और आत्मनिर्भरता की एक नई तस्वीर उभर रही है, जहां कभी नक्सल हिंसा से प्रभावित रहे क्षेत्रों में अब युवाओं के हाथों में हुनर और भविष्य के प्रति गहरा विश्वास दिखाई दे रहा है। राज्य सरकार की मंशा है कि बस्तर का प्रत्येक युवा अपनी प्रतिभा और मेहनत के बल पर आगे बढ़े तथा विकास की मुख्यधारा में अपनी सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करे।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार द्वारा आत्मसमर्पित माओवादियों और नक्सल प्रभावित परिवारों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए कौशल विकास एवं रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इस पहल के तहत बस्तर संभाग के कुल 7,567 आत्मसमर्पित माओवादियों में से अब तक 2,323 लोगों को बीजापुर, दंतेवाड़ा, सुकमा, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, कोंडागांव और गरियाबंद जिलों में विभिन्न व्यवसायों का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
प्रशिक्षण के माध्यम से युवाओं को असिस्टेंट इलेक्ट्रिशियन, राजमिस्त्री, सोलर पीवी इंस्टॉलर (सूर्यमित्र), दोपहिया एवं चारपहिया वाहन मरम्मत तकनीशियन तथा सिलाई मशीन ऑपरेटर जैसे रोजगारोन्मुखी व्यवसायों में दक्ष बनाया जा रहा है। इसके साथ ही, बस्तर संभाग के आठ में से छह पुनर्वास केंद्रों—बीजापुर, दंतेवाड़ा, नारायणपुर, सुकमा, बस्तर और कांकेर—को व्यावसायिक प्रशिक्षण प्रदाता (VTP) के रूप में पंजीकृत किया गया है, जिससे प्रशिक्षण की व्यवस्था और अधिक प्रभावी हुई है।
दूरस्थ एवं नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में संचालित ‘नियद नेल्ला नार योजना 2.0’ विकास और विश्वास का एक महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। इस योजना के अंतर्गत 10 जिलों में अब तक कुल 1 लाख 11 हजार 165 युवाओं को प्रशिक्षण प्रदान किया गया है, जबकि 50 हजार 53 युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों में सफलतापूर्वक नियोजित किया गया है। बीजापुर और बस्तर जिलों में प्रशिक्षित युवाओं को गारमेंट फैक्ट्री, राजमिस्त्री, पुलिस बल, सुरक्षा गार्ड तथा कृषि कार्यों जैसे क्षेत्रों में रोजगार के अवसर प्राप्त हुए हैं।
युवाओं को प्रशिक्षण से जोड़ने की प्रक्रिया को और सुगम बनाने के लिए आधार कार्ड की अनिवार्यता में विशेष शिथिलता प्रदान की गई है, ताकि दस्तावेजों के अभाव में कोई भी पात्र युवा वंचित न रहे। साथ ही, प्रत्येक विकासखंड में एक स्किल डेवलपमेंट सेंटर (SDC) स्थापित करने की दिशा में तेजी से कार्य किया जा रहा है और आवासीय प्रशिक्षण सुविधाओं के विस्तार के लिए नवीन मद में 780 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है।
बस्तर में कौशल विकास और पुनर्वास की यह पहल केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक सामाजिक बदलाव की प्रक्रिया है। आत्मसमर्पित माओवादियों और प्रभावित परिवारों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाकर उन्हें सम्मानजनक जीवन देने के ये प्रयास क्षेत्र में स्थायी शांति, समृद्धि और विकास का एक नया वातावरण तैयार कर रहे हैं।

