कुख्यात गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई को लेकर हाल ही में एक बड़ा और सख्त प्रशासनिक कदम उठाया गया है। उसकी आपराधिक गतिविधियों और जेल के भीतर से भी नेटवर्क चलाने की साजिशों पर पूरी तरह लगाम कसने के लिए उसे गुजरात के अहमदाबाद स्थित साबरमती सेंट्रल जेल में शिफ्ट कर दिया गया है। देश की सबसे सुरक्षित जेलों में शुमार साबरमती में उसे एक बेहद कड़ी निगरानी वाले जोन में रखा गया है।
गैंगस्टर को साबरमती जेल के सबसे प्रतिबंधित और सुरक्षित माने जाने वाले ‘200 खोली’ (ब्लॉक 200) नामक हाई-सिक्योरिटी सेल में रखा गया है। यह वही ब्लॉक है जहां अहमदाबाद सीरियल ब्लास्ट के दोषी आतंकवादियों और देश के अन्य बेहद खतरनाक सजायाफ्ता अपराधियों को रखा जाता है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि प्रशासन उसकी सुरक्षा और गतिविधियों को लेकर कितना गंभीर है।
इस ‘200 खोली’ ब्लॉक की वास्तुकला और व्यवस्था इस तरह से डिजाइन की गई है कि कैदी बाहरी दुनिया या अन्य साथियों के संपर्क में आसानी से न आ सकें। इस पूरे ब्लॉक को चार उप-हिस्सों में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक हिस्से में लगभग 50 कैदी रहते हैं। लॉरेंस बिश्नोई को करीब 7.5 गुणा 11 फीट की एक अकेली सेल में रखा गया है, जहां उसकी हर हरकत पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रखी जा रही है।
इस नई और सख्त व्यवस्था के लागू होने के बाद लॉरेंस बिश्नोई का बाहरी दुनिया से संपर्क लगभग पूरी तरह कट गया है। पहले विभिन्न जेलों में रहते हुए उसके द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल, वीडियो कॉल करने या मीडिया इंटरव्यू देने जैसी जो खबरें सामने आती थीं, उन पर अब पूरी तरह ब्रेक लग गया है। इसके अलावा, सुरक्षा के लिहाज से उसकी अदालती पेशियों को भी प्रत्यक्ष रूप से ले जाने के बजाय अब वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ही पूरा किया जा रहा है।
जेल सूत्रों और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस हाई-सिक्योरिटी सेल में आने के बाद लॉरेंस की दिनचर्या में भी काफी बदलाव आया है। उसका अधिकांश समय अब पूरी तरह एकांत में बीतता है, जिसमें वह ज्यादातर समय ध्यान लगाने (मेडिटेशन), हनुमान चालीसा का पाठ करने और एक सात्विक जीवन शैली अपनाने में बिता रहा है। हालांकि, सुरक्षा एजेंसियां और पुलिस विभाग इस बात से पूरी तरह आश्वस्त नहीं हैं कि केवल उसके अकेले रहने से पूरा नेटवर्क खत्म हो जाएगा।
सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि भले ही लॉरेंस को व्यक्तिगत रूप से पूरी तरह अलग-थलग कर दिया गया हो और उस पर शिकंजा कस गया हो, लेकिन उसका विशाल आपराधिक सिंडिकेट अभी भी विदेश में बैठे उसके सहयोगियों के इशारे पर संचालित हो रहा है। गोल्डी बराड़ और रोहित गोदारा जैसे विदेशों में छिपे उसके खास गुर्गे इस नेटवर्क को संभालने की कोशिश में लगे हुए हैं।
इसी कारणवश, देश की तमाम खुफिया और सुरक्षा एजेंसियां केवल साबरमती जेल के भीतर की व्यवस्था तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे विदेश में बैठे उसके सहयोगियों के हर कदम पर भी लगातार नजर बनाए हुए हैं। इस हाई-प्रोफाइल शिफ्टिंग के बाद यह देखना अहम होगा कि क्या इस सख्त कार्रवाई से देश में ऑर्गेनाइज्ड क्राइम और गैंगवार की गतिविधियों पर स्थायी अंकुश लग पाता है या नहीं।

