चेहरे पर प्राकृतिक निखार (Natural Glow) पाने के लिए लोग अक्सर तमाम तरह के महंगे स्किन केयर प्रोडक्ट्स और घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल करते हैं। हालांकि, कई लोग इस बात से अनजान होते हैं कि योग केवल शरीर को फिट रखने का ही काम नहीं करता, बल्कि यह हमारी त्वचा का भी उतनी ही गहराई से ख्याल रखता है। नियमित रूप से कुछ खास योगासन करने से चेहरे पर बिना किसी कृत्रिम उपाय के कुदरती चमक हासिल की जा सकती है।
इस कड़ी में ‘अधो मुख श्वानासन’ को बेहद असरदार माना गया है, जो सूर्य नमस्कार का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस योगासन को अपनी दिनचर्या में शामिल करके तन और मन दोनों को स्वस्थ रखा जा सकता है। नियमित अभ्यास से शरीर में रक्त संचार (Blood Circulation) तेजी से बढ़ता है, जिसका सीधा सकारात्मक असर चेहरे की रौनक पर दिखाई देता है।
अधो मुख श्वानासन करने की प्रक्रिया बेहद सरल है, जिसे सही तरीके से आसानी से किया जा सकता है। इसके लिए सबसे पहले पेट के बल लेटकर लंबी सांस लें और फिर अपने हाथों व पैरों के सहारे शरीर को ऊपर उठाएं। इस दौरान अपनी कोहनी और घुटनों को एकदम सख्त रखते हुए कूल्हों को ऊपर उठाना होता है, जिससे शरीर का आकार अंग्रेजी के अक्षर ‘V’ जैसा बन जाता है।
इस योगासन की मुद्रा में अगले चरण के तहत हाथों से जमीन पर हल्का दबाव बनाते हुए अपनी नजरों को नाभि पर टिकाना होता है। इस स्थिति में कुछ सेकंड्स तक बने रहने के बाद, घुटनों को वापस जमीन पर टिकाते हुए मेज (Table Top) वाली पोजीशन में आ जाना चाहिए। यह आसन रीढ़ को लचीला बनाने और शरीर के निचले हिस्से को मजबूती देने के साथ-साथ तनावमुक्त रखने में भी मदद करता है।
त्वचा की सेहत के लिए ‘पश्चिमोत्तानासन’ भी एक बेहद गुणकारी हठ योग आसन है, जिसे सीटेड फॉरवर्ड बेंड के नाम से भी जाना जाता है। इसे आमतौर पर सूर्य नमस्कार के तुरंत बाद किया जा सकता है। इस आसन के नियमित अभ्यास से पेल्विक एरिया में ब्लड सर्कुलेशन बेहतर होता है, जो रीढ़ को मजबूती देने, पाचन तंत्र को सुधारने और वजन को नियंत्रित करने में सहायक है।
पश्चिमोत्तानासन को करने के लिए जमीन पर अपने दोनों पैरों को सीधे फैलाकर बैठना पड़ता है। इसके बाद गहरी सांस लेते हुए शरीर को धीरे-धीरे आगे की ओर झुकाना होता है और अपनी क्षमता के अनुसार हाथों से पैरों को छूते हुए सिर व नाक को घुटनों से मिलाने का प्रयास किया जाता है। हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का सुझाव है कि इस प्रक्रिया के दौरान शरीर पर जरूरत से ज्यादा दबाव नहीं डालना चाहिए और किसी भी स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में पेशेवर डॉक्टर या योग गुरु की सलाह अवश्य लेनी चाहिए।

