प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने पश्चिम बंगाल और ओडिशा में एक बहुत बड़े लोन फ्रॉड और मनी लॉन्ड्रिंग मामले के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई की है। इस हाई-प्रोफाइल कार्रवाई के तहत केंद्रीय जांच एजेंसी ने कई ठिकानों पर छापेमारी करने के बाद करोड़ों रुपये की संपत्तियों और बैंक खातों को अपने कब्जे में ले लिया है। केंद्रीय जांच एजेंसी द्वारा की गई यह कार्रवाई वित्तीय जगत में बड़े पैमाने पर चर्चा का विषय बनी हुई है।
इस पूरी कार्रवाई का मुख्य केंद्र कोलकाता और पश्चिम बंगाल में पंजीकृत गुप्ता पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड (GPIL) और उससे जुड़ी अन्य इकाइयां हैं। जांच एजेंसियों के अनुसार, यह कंपनी बिजली के केबल और कंडक्टर बनाने के कारोबार से जुड़ी हुई है, जिसके प्रमोटरों पर बड़े पैमाने पर वित्तीय हेरफेर और धोखाधड़ी करने के गंभीर आरोप हैं।
ईडी के कोलकाता जोनल ऑफिस-II के अधिकारियों ने पिछले महीने की 5 तारीख को इस मामले में बड़ा एक्शन लिया था। अधिकारियों ने पश्चिम बंगाल और पड़ोसी राज्य ओडिशा में जीपीआईएल, उससे जुड़ी कंपनियों और उसके मैनेजमेंट से संबंधित कुल 9 ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी और तलाशी अभियान चलाया था।
प्रवर्तन निदेशालय ने प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA), 2002 के सख्त प्रावधानों के तहत इस बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया है। जांच के दौरान एजेंसी ने कंपनी और उससे जुड़े विभिन्न व्यक्तियों के कुल 139 बैंक खातों को पूरी तरह से फ्रीज कर दिया है, जिससे इन खातों में जमा भारी-भरकम राशि को अब आरोपी निकाल नहीं सकेंगे।
बैंक खातों के अलावा ईडी ने इस मामले में कई अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों को भी अपने शिकंजे में लिया है। कॉर्पोरेट कंपनी और उससे जुड़े लोगों के नाम पर रखे गए कई म्यूचुअल फंड और शेयर भी फ्रीज किए गए हैं। इसके अलावा, जांच में सामने आए वित्तीय लेन-देन के आधार पर 3 लग्जरी कारों (जिनमें 2 मर्सिडीज और 1 बीएमडब्ल्यू शामिल हैं) को भी जब्त किया गया है। साथ ही कई आपत्तिजनक दस्तावेज, डिवाइस और रिकॉर्ड भी बरामद किए गए हैं।
यह पूरा मामला लगभग 3,590 करोड़ रुपये के विशाल बैंक लोन फ्रॉड से जुड़ा हुआ है। इस धोखाधड़ी की शुरुआत केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा दर्ज की गई उस एफआईआर से हुई थी, जिसमें बैंकों के एक कंसोर्टियम (संघ) को भारी वित्तीय चूना लगाए जाने की शिकायत की गई थी। इस कंसोर्टियम में केनरा बैंक लीड बैंक था, जिसका अकेले का मंजूर किया गया एक्सपोजर लगभग 1,174 करोड़ रुपये था।
प्रारंभिक और विस्तृत जांच में यह सनसनीखेज खुलासा हुआ कि कंपनी ने बैंकों से बड़ी मात्रा में फंड-बेस्ड और नॉन-फंड-बेस्ड वर्किंग-कैपिटल सुविधाएं हासिल करने के बाद अपनी ड्रॉइंग पावर (उधार लेने की क्षमता) और ऑडिटेड वित्तीय विवरणों में भारी हेरफेर किया था। कंपनी की वास्तविक परिसंपत्तियों और बकाया रकम में लगभग 1,115 करोड़ रुपये का बड़ा अंतर पाया गया, जिससे यह संकेत मिलता है कि ऋण सीमा को कृत्रिम रूप से बढ़ाने के लिए दस्तावेजों के साथ खिलवाड़ किया गया था।
जांच एजेंसियों का यह भी मानना है कि बैंकों से मिले इस भारी-भरकम ऋण के एक बड़े हिस्से का गलत इस्तेमाल किया गया और उसे अन्यत्र डायवर्ट (फंड डायवर्जन) कर दिया गया। फिलहाल, ईडी द्वारा की गई इस व्यापक जब्ती और फ्रीजिंग की कार्रवाई से लोन फ्रॉड करने वाले जालसाजों में हड़कंप मच गया है और एजेंसी इस घोटाले से जुड़े अन्य सहयोगियों व संदिग्धों की वित्तीय जांच तेजी से आगे बढ़ा रही है।

